Posted by: rajprajapati | 26/07/2016

भारतके सभी राजनैतिक दल अवैध है।

भारतके सभी राजनैतिक दल अवैध है।

आज हमारा भारत देश कोमवाद जातीवाद, मंहेगाइ, बेरोजगारी एवं भ्रष्ट्राचारसे उबल रहा है। राजकीय एवं प्रसाशनिक आंतकवाद चलाया जा रहा है,

यह सब इसलीये हुआ है की हमने अपने स्वार्थ मतलबके लीये अपनी जातवाले और अपनी कोमवालोको जनप्रतिनिधि चून कर अपना अधिपति बनाया है । हमारी जातवाले ही हमे नोच रहे है ।

हमने जैसे कर्म कीये है वैसा फल हम भुगत रहे है । हमे अब बदलना होगा, हमे ही अब व्यवस्थाओको बदलना होगा, वर्तमान इतना बुरा हाल है तो हमारे बच्चोका और परीवारका भविष्य कितना डरावना होगा ?

हमे लोकशाही प्रशासन व्यवस्था का निर्माण करना होगा, वर्तमान व्यवस्थायें राजनैतिक व्यवस्थायै है। हमे सामान्य नागरीकका जनप्रतिनिधि चुनना होगा, हमे अपना जनप्रतिनिधिका चयन करना होगा, आजा तक हमा राजनैतिक दलोके प्रतिनिधिओका चयन करते आये है।

भारतके सभी राजनैतिक दल अवैध है । इसके लीये भारतके संविधानकी मुलभुत अधिकारोकी धारा १४, १६, १९ को हमे एकसाथ जोडकर समजना होगा, जीसमें

धारा-१४ “विधि के समक्ष समता-

     राज्य, भारत के राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्षा समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा,”

धारा १६ “लोक नियोजन के विषयमें अवसर की समानता—

(१) राज्यके अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषयोमें सभी नागरीकों के लीये अवसर की समता होगी,

(२) राज्य के अधीन किसी नियोजन या पद के संबंध में केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, उदभव, जन्मस्थान, निवास या इनमें से किसी के आधार परा ना तो कोइ नागरीक अपात्र होगा और ना उससे विभेद किया जाएगा।”

धारा-१९ स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण—

     (क) वाक-स्वातंत्र्य और अभिव्यक्ति-स्वातंत्र्य का,

     (ख) शांतीपुर्वक और निरायुध सम्मेलन का,

     (ग) संगम या संघ बनाने का,

     (घ) भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण का,

     (च) भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भागा में निवास करने और बस जाने का,

     (छ) कोइ वृति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार करने का,

     यह मूल अधिकार की धारा का स्पष्ट निर्देश फलीत होता है की जनप्रतिनिधि के निर्वाचन से निर्वाचित घोषित होनेवाले सभी व्यक्ति राजकोष से वेतन, पेन्शन, चिकित्सा सहाय, एवं अन्य लाभ प्राप्त करते है।

धारा-१६ की परीभाषा से फलीत होता है, की राजनैतिक दलसे दुबारा एवं बारबार नामांकन भरके निर्वाचित होनेवाले सभी व्यक्ति धारा-१६ का भंग करते है वहा अपने ही दलके दुसरे सभी सदस्यो के ही अधिकारो का शोषण करते है, 

भारतके सभी राज्यक्षेत्र के व्यक्ति एवं कोइ भी दलके सदस्य को निर्वाचन की समता का अधिकार है फिर भी सभी राजनैतिक दल उनके मुल अधिकारोंकी समता को खत्म करके एक ही व्यक्ति को दुबारा निर्वाचित होनेका नामांकन देती है।

सभी राजनैतिक दल में होनेवाली कोष का कभी ओडीट नहीं होता है, राजनैतिक दलको मीलनेवाली धन राशीका अवैध व्यवहार होता है, जाहेर सेवामें कोषका अवैध व्यवस्थापन ही राजनैतिक दलोकी बदनियतको घोषित करता है,

हम ज्यादातर राजनैतिक दलके प्रतिनिधिका निर्वाचन करते रहे है। हमे जना समुदाय के जनप्रतिनिधिका निर्वाचन समजना होगा। हम भारत के जन समुदाय को लोकशाही ढांचे का निर्माण करना होगा।

भारत के चूनाव आयोग को हम सब भारतीय जन समुदाय की ओर से याचीका दायर करनी होगी की चूनाव आयोग इस विषयमें गहन अभ्यास करके जनप्रतिनिधि की निष्पक्ष विधि बनाये,

भारत के सर्वोच्च न्यायपालीका को भी हमारे जन समुदायकी ओर से याचीका होनी चाहिये और इस विषय पर चर्चा होनी चाहिये।

     आप लोकशाही व्यवस्थाओ के सही निर्माणमें सहयोगी बनने के लीये इस विषय को सभी सोशियल मिडीयामें प्रसारीत करने में अपना प्रदान करने की कृपा करे.

https://rajprajapati.wordpress.com, Gandhinagar, Gujarat, Bharat.


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