Posted by: rajprajapati | 05/10/2013

कल पास करवाया हुआ , पप्पु आज फेइल भी हो गया

कल पास करवाया हुआ , पप्पु आज फेइल भी हो गया

राहुल गांधीने गुजरातकी मीडीया कलबसे की कोर्पोरेट कान्फारन्स

नरेन्द्र मोदी जीत नहीं रहे है, गुजरातकी कोंग्रेस ही हार जाती है,

दिनांक़:-03-10-2013, गांधीनगर, ग़ुजरात    

     गुजरातके दो दिनके दौरे पर आये कोंग्रेसके उपाध्यक्षने आज गुजारतमें प्रभावित न्युझ चेनल और प्रिन्ट मीडीयाके चुने हुए लोगोके साथ बंध हालमें कोर्पोरेट प्रेस कान्फरन्स करके मीडीया कलबके साथ साझेदारीका कोर्पोरेट वार्तालाप कीया है, लोकसभा और विधांसभाका चुनाव मीडीयाके लीये जन्मदिनके समारोह जैसा होता है चुनावके दिनोमें सब मीडीयाको खरीदते है और मीडीयाभी सबके लीये बिकता है, वह हकिकत आज गुजरातकी जनताको समजमें आये ऐसी व्यवस्था बनाकर गुजरात कोंग्रेसने मीडीयाके चुने हुए कोपोरेट लोगोसे राहुल गांधीका कान्फरन्स करवा दिया है,

       पार्टीके कार्यकर्ताओको चुनावी सुझाव बांटनेके अलावा खास तौरसे गुजरातके मीडीयाके चुने हुए लोगोकी साझेदारीके लीये नीकले कोंग्रेसपक्षके उपाध्यक्ष राहुल गांधीने पहले दिन अमदावादके गुजरात युनीवर्सीटी कान्वेन्शन हालमें कार्यकर्ताओ को संबोधित करनेके बाद लींडींग अखबारके समाहर्ताओ और इलेकट्रानीक मीडीयाके ब्युरो चीफ जैसे मीडीया आलमके लोगोके साथ एक बडे कमरे कान्फरन्स करके आम जनताके साथ सीधे जुडे रहेनेवाले 600से अधिक स्थानीय मीडीया कर्मीओकी अवलेहना करना अब चर्चाका विषय बना है,

       राष्ट्रके सबसे बडे राष्ट्रीय पक्षके उपाध्यक्षकी उपस्थीतीमें आनेवाले लोकसभाके चुनावसे सबंधित प्रेस कान्फरन्सके लीये गुजरात कांग्रेसने अपनी पसंदके संवाददाताओ और अखबार नवेशोसे गोपनीय तरीकेसे कान्फरन्स करवायी है,  मीडीया कलबके अलावा बहुत सारे संवाददाता राहुल गांधीसे दुर रहे उसके लीये गुजरात कोंग्रेसने पहेलेसे ही सावधानी बर्ती हुइ नजर आयी है, इस उच्च नीचके तोल-नापके कारन काफी मात्राके संवाददाताओके लीये व्यावसायीक तरीकेका यह मीलनमेला अब चर्चाका विषय बना है, संदेहजनक रूपसे राहुल गांधीको कोर्पोरेट तरीकेसे मीलवानेकी गुजरात कोंग्रेसकी इस साजीश मोदीकी जीत आसान करनेके लीये अपनोको जीतने नहीं दिया जाये ऐसी नजर आ रही है,

        आजतक आम आदमी और अखबार पढनेवाले, न्युझ चेनल देखनेवाले दर्शक यही समजते आये है, की मीडीयाकर्मी आम जनाताको सब सच बताते है लेकीन चुनावमें मीडीयाको नीजी तरफदार बनाकर एक तरीकेसे सांझेदारी करनेके लीये बंध कमरेमें कोर्पोरेट कान्फरन्स करके आम जनतामें एक संदेहात्मक संदेश प्रसारीत कीया है,

        मीडीयावालोसे कोइ सांझेदारी करनी थी, अगर मीडीयाके लोगोको खरीदना था तो नीजी व्यवस्थामें टेबल मींटींगभी कर शकते थे, कन्वेशन हालके पास बडे कमरेमें क्यु यह सब कीया गया है?, राहुल गांधीने उदबोधन अच्छा कीया, लेकीन जीस तरीकेसे प्रेस मीट बुलायी गयी उसको देखके ऐसा माना जाता है की मीडीया कलबके सदस्योको पहेचानपत्र जारी करनेके समय पर सुचीके अनुसार चुनावी लेनदेनका कोइ समजोता करनेकी योजना बनायी गयी होगी,

       राहुल गांधीने 2014के लोकसभा चुनावको जीतनेके लीये कोर्पोरेट तरीका अपनाया हुआ फलीत होता है, गुजरात कोंग्रेसकी प्रेस कान्फरन्समें सबसे अधिक संवाददाता सामील होते है, कोंग्रेसके इतिहासमें आज पहेलीबार चुने हुए नवेशोको ही प्रेस वार्तालापके लीये सामील कीया गया था इस बात को लेकर मीडीयामें तरह तरह के नाप-तोल कीया जा रहा है,

       पीछले एक दसकमें गुजरात कोंग्रेसने सबुतके साथ नंरेन्द्र मोदीके भ्रष्टाचारको मीडीयाके सामने पेश करके मोदी पर बारबार इल्जामात लगाये है, माहिती अधिकारकी याचीकाके जरीये प्राप्त सबुतोको दिखाकर अखबारोके जरीये आम जनताके सामने जुबानी इल्जाम प्रसारीत कानेवाले गुजरात कोंग्रेसके नेताओने आज तक मोदी सरकारके (मोदी सरकार ही बोला जाता है, भाजपा सरकार बोलनेसे मोदीए की लात खानी पडती है) उपर एक भी जनहित याचीका दर्ज करवायी नहीं है,यह बताता है की कोंग्रेसके स्थानीय नेता मोदीको हरानेके पक्षमें नहीं है,

       कोंग्रेसने जीतने भी इल्जामात नरेन्द्र मोदीके उपर लागाये है वह अगर सच है तो सबुतोके साथ जनता के प्रतिनिधिकी जिम्मेवारी अदा करते है नरेन्द्र मोदीकी सरकारमें भ्रष्टाचार के लीये जिम्मेवार मंत्री इवं अफसरोके सामाने राज्यकी वडी अदालतमें जनहित याचीका दर्ज करवा के नरेन्द्र मोदीके भ्रष्ट्राचार को आम जनाता के सामने रखना चाहिये था, आज तक सीर्फ अखबारोकी सुर्खीयोमं रहेने की लीये ही तरह तरह के इल्जामात लगागे नंरेन्द्र मोदीको जीताने के लीये अपनो को जीतने नाहीं देनेकी राजनिती गुजरात कोंग्रेसके मोवडी नेताओने अपनायी हुइ लगती है

       नरेन्द्र मोदी राजनीतीका आदमी नहीं है वह तो स्वयंसेवक थे लेकीन आज तक लगातर भारी बहुमतसे जीतना और सरमुखत्यार जैसी 11 सालसे सरकार चलाते रहनेके पीछे गुजरात कोंग्रेसकी संदेहजनक भुमीका होनेकी चर्चाभी होने लगी है, मोदी चुंनाव जीतते नहीं है, लगता है की कोंग्रेस ही अपने लोगोको हरा देती आयी है, लोकयुक्त नहीं थे उनका मतलब, यह तो नहीं था की, मोदीके  सामने हाइकोर्टमें कोंग्रेसके कार्यकर्ता और नेता जनहित याचीका दायर करके भ्रष्टाचारको रोक शकते है, और वैसे भ्रष्ट लोगोको दंडीत भी करवा शकते थे, गुजरात कोंग्रेसके नेता चाहे तो आज भी मोदीकी आसमानको छुनेवाली राजकीय प्रतिष्ठाको चुपकीमें जमीनकी मीटेमें मीला शकते है, लेकीन कोइ अंदरुनी वजहसे कोंग्रेसके आला नेता ऐसा क्यु नहीं करते है?  वह पीछले छेह सालोसे कोंग्रेसपक्षके कार्यकर्ताओमें चर्चा और चिंताका विषय बना रहा है, एक घुमने फीरने वाला स्वयंसेवक लागातार दिल्ही की और पुरी कोंग्रेसके अस्तित्वको मीटानेके लीये कैसे पहुंच गया है?,  अब जल्दसे जल्द दिल्ही कोंग्रेसको जांच करके खोजना जरूरी होगा, नहीं तो मोदी दिल्हीकी गद्दी पर चढ जायेगें तो फीर कोंग्रेसके अस्तित्वको बनाये रखना बहुत मुश्कील होगा.

       नरेन्द्र मोदीके दोस्त और पुराने साथी शंकरसिंह वाघेलाको कोंग्रेसमें आने के बाद कोंग्रेसके पुराने कार्यकर्तामें काफी संदेह रहता है, क्युकी शंकरसिंह बाघेलाको मोदीसे कोइभी दुश्मनी नहीं है, शंकरसिंह बाघेलाने जब भाजपा छोडा वह तो केशुभाइ पटेलके कारन छोडा था, शंकरसिंह बाघेलाकी नंरेन्द्र मोदीसे तो कोइ दुश्मनी नहीं है, तो उसको फीरसे भाजपामें वापस जाना चाहिये था उसके बजाय कोंग्रेसमें क्युं समेल हुए है?, अब सोचनेवाली बात यह है की, शंकरसिंह बाघेला और उनके पुत्र विधानसभाका पीछला चुनाव जीत गये है, तो दुसरी ओर शक्तिसिंह गोहिल, अर्जुन मोढवाडीया और सिध्धार्थ पटेल जैसे मुख्य नेता भारी मतोकी दुरीसे हार गये है, इस सब हकिकतोको डीझीटल एक्ष-रे प्रिन्ट और सोनोग्राफी रीपोर्ट करके देखा जाये तो लगता है की, “मोदी जीत नहीं रहे है, गुजरातकी कोंग्रेस ही हार जाती है,”                                                         


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