Posted by: rajprajapati | 21/09/2013

प्रधानमंत्रीके लीये नरेन्द्र मोदी क्युं? और कोइ क्युं नहीं?

प्रधानमंत्रीके लीये नरेन्द्र मोदी क्युं? और कोइ क्युं नहीं? ..क्योंकी

नरेन्द्र मोदी प्रार्थनाशक्ति और संकल्पशक्तिमें श्रध्धा रखते है,

       125 करोडसे ज्यादा आबादीवाले लोकशाही राष्ट्रका महारजा बननेकी लीये आज आम जनताने नरेन्द्र मोदीको प्रधानमंत्री बनानेका मन बना लीया है, तो सबको यह भी सोचना होगाकी प्रधानमंत्री पदके लीये अब नरेन्द्र मोदीको ही क्यु चुना जायें ?, और कीसीको क्यु नहीं ? आखीर कैसे संजोगसे यह सब होता है ? क्या नरेन्द्र मोदीके नसीबसे हो रहा है ?, नरेन्द्र मोदीकी जन्मकुंडलीमें चक्रवती राजयोग होनेका कोइ ग्रहमान नहीं है, ग्रहोकी प्रतियुति ओर प्रत्युंतरयुतिमें भी चर्कवती राजयोग नही होता है फीर भी अब देशके लोकमानस पर नरेन्द्र मोदीका भुत क्युं सवार हो गया है ?, आज देखो तो देशमें कोइ जगा पर भाजपा का नाम नहीं लीया जाता बल्की सीर्फ नरेन्द्र मोदीके नामसे ही बात शूरू होती है।

      नरेन्द्र मोदीकी अविरत राजनैतिक सफलताका रहस्य क्या है ? मोदीने कोइ विचक्षण या सामुहिक संमोहन (मास हिप्टोनीझम )का प्रयोग भी नहीं कीया है, ना तो मोदीको कोइ तांत्रीकका सहारा मीला है, फीर मोदीका यह जादु कैसे पैदा होता है, भारतवासीओको नरेन्द्र मोदीकी पहेचान अभी अभी आखरी 14 सालोमें हुइ है उसके पहेलेका मोदीका कैसा जीवन रहा है वह तो सीर्फ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघके उनके सहकार्यकर्ता ही जानते होगे, अब सब लोगो यह तो जानते है की मोदी आर.एस.एस. में प्रचारककी जिम्मेवारीके लीये देशभरमें काफी यात्रा कर चुके है, मोदी 35 सालसे ज्यादा समय तक धोती-लोटा लेकर चलते रहेनेवाला यात्रीक बने रहे है, मोदी प्रवासी बने नहीं, यात्रीक बने रहे, उसके कारन हजारो लोगोसे उसको शीखनेका मौका मीला है, लाखो लोगोसे मिलनेका अवसर मीला है, आज मोदीकी सफलतामें सबसे बडा रहस्य उनकी यात्राओसे मीला ज्ञान और सतकर्मोका फल है॥

      सुत्रोके जानकारीसे मालुम होता है की मोदी आध्यशक्ति नवदुर्गाके बडे उपासक है, चैत्र माहकी नवरात्रीके नौ दिन तक मोदी पानीके सीवा दुसरी सभी चीजका उपहास करके व्रत रखतें है, 51 शक्तिपीठोमें से 42 शक्ति पीठोमें आध्यशक्तिके स्थानो पर दर्शन-अर्चनका लाभ ले चुके नरेन्द मोदीको विर्यवान पुरूष माना जाता है, मोदीको बडा खीलाडी माननेवालोको यह भी जानना जरूरी है की, मोदी आध्यत्मिक संचारसे बने संजोगोमें सहज चल रहा आम आदमी ही है, उसको वैसे कोइ बुध्धी लगानेकी आवश्यकता ही नही होती है, मोदीने अपने राष्ट्रीय स्वयंसेवक कालमें विविध शास्त्रो और आध्यात्मिक एवं सामाजीक उत्थानके लीये सेवामय रह चुके पुर्व महानुभावोकी काफी किताबोका एकाग्रतासे अध्यन कीया है, ध्यानपुर्वक कीये जानेवाले पठनसे ही अपने आप ज्ञानकी स्फुरना होती है, मोदीने भुखका काफी अनुभवभी लीया है, पदयात्रा का उनका अनुभव इतना है की देशमें आजका कोइ नेता ऐसा नहीं है जो आज तक मोदीने जीतनी पदयात्रा की है उतना पुरी जीदंगीमें चल पायेगा,

      मोदी समयपालन और अनुसाशनके आग्रही रहे है, मोदी बत्रीस लक्षणा विर नहीं है लेकीन ध्यान-योगसे उसने स्वयं आत्मस्फुरणाकी एक विशेष पराशक्तिका निर्माण जरूर कर लीया है, आध्यात्मिक शक्ति और स्वयं पाये समाजके विभीन्न क्षेत्रोके अनुभवने उसको परीपुर्ण रूपसे सक्षम बना दिया है, मोदीमें सारी अच्छाइया ही नहीं है, मोदीमें बहुत सारी गलत आदते है, मोदीभी काफी लघुताओमें बंधीत है, गुजरातके मुख्यमंत्री बननेके पहेले मोदीको जाननेवालोके लीये मोदीकी कोइ खास अहेमीयत नहीं थी अब जाने अन्जाने सब मोदीकी माला क्युं जपने लगे है?,  

      मोदीका कीसी भी तरहसे विरोध करनेवाले अपने आप कोइ गर्तामें चला जाता है, मोदी उनके विरोधीओके लीये कोइ कदम नहीं उठाते है, फीर भी मोदीका बुरा चाहनेवाला अपने आप क्यु गर्तामें चला जात है? मोदीके सामने अवरोध करनेवाले बडे-बडे सुरमाओकी राजकीय हस्तीया क्युं खत्म हो गयी है? सच होते हुए भी मोदीका जीतना उलटा बोलो उतना उसको फायदा होता है, ऐसा क्यु होता है? कदाचन मोदीको दस महाविध्याओका ज्ञान होगा?, कदाचन मोदीको कोइ अज्ञात शक्तिओकी कृपा होगी?, नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है, मोदी संकल्पशक्ति और आत्मशक्तिसे जीनेवाला अनोखा दैवीउपासक है, मोदीको पराजीत कीया नहीं जाता क्युंकी मोदी ही खुद मोदी नहीं है, आर.एस.एस.के उनके साथीओको पुछो, कोइ भी माननेको तैयार नहीं होगा की यह नरेन्द मोदी पहेला का स्वयंसेवक था वह नरेन्द्र मोदी है, इतना बदलाव एवं इतनी राजनैतिक अनुकुलताका कारन कयां हो शक्ता है? मोदीकी बेहिसाब सफलता का रहस्य क्यां है?

      मोदी प्रार्थनाशक्ति और संकल्पशक्तिमें श्रध्धा रखते है, जबानी बोलकर नहीं हक्कितमें वह भविष्यके करनेवालो कार्योका बहुत पहेलेसे संकल्प कर चुके होते है, बादमें उस संकल्पके लीये नियमित रूपसे प्रार्थना करके संकल्पको बल प्रदान कीया जाता होगा, मोदीके बेक-ग्राउन्डमें कोइ राजनैतिक होर्मोन्सभी नहीं है फीरभी राजनीतिमें मोदी अविरत सफलता हासील करते जाते है, आज देशकी बडी राष्ट्रीय राजनैतिक दल कोंग्रेअके पास मोदीके सामने खडा रखनेके लीये कोइ लोकप्रिय नेता नहीं है, भाजपाके पास भी मोदीके सीवा कोइ लोकप्रिय नेता नहीं है, इस सब कैसे संजोग निर्माण हो गया है? एक दिन या एक दो सालमें यह सब नहीं होता है, यह सब कैसे और क्यु हुआ उसके पीछे सीर्फ मोदीका आध्यात्मिक पावर ही काम करता है, 1995 के पहेले खींची गयी तस्वीरो और आजकी तस्वीरोको देखकर आप सबको उनका मुलरूपमें हुआ बालाव साफ नजर आयेगा, मोदीसे बढकर ज्ञानी और राजनीतिके माहिर खीलाडी बहुत है, लेकीन मोदीको जो अनुकुलता मीलती है, वह सबको नहीं मीलती है, मोदीके दिमागसे 10 गुना ज्यादा पावरफुल दिमागभी गुजरातके बहुत सारे लोगोमें होगा लेकीन मोदीके निमितमें इतनी सारी सफलता कहासे आ रही है?

      मोदीके पास अपनना नीजी कार्यभार संभालनेवाले न्युनतम 200से ज्यादा विश्र्वासु लोग है, मोदीको ऐसे लोग अपने आप मीले है, मोदीके आनेके बाद सचीवालयके सचीव गांवकी मीट्टीमें जाकर फील्डवर्क भी देखने लगे है, राज्यका चीफ सेक्रेटरी गांवकी प्राथमीक पाठशालामें जाकर कार्यरीतीकी समिक्षा करते है, सचीवालयके आला अधिकारी गांव गांव तक अपने आपको घीसटते रहते है, मोदीके लीये काम करनेवालोके सीवा बाकीके अफसरोको मोदीका डर रहेता है, मंत्रीमंडल हो, या विधायक हो, मोदीके सामने अपनी बात रखनेके पहेले हिम्मत जुटानी पडती है, उसका कारन क्या है? मोदी कीसीको डराते धमकाते नहीं है, ना तो उसकी बात सुननेको ना बोलते है, मोदी हर आदमीकी बात ध्यानसे सुनते है और हो शके तो उसी वकत उनके लीये कदम भी उठाते है, आजका अब करनेवाले मोदी अपने रोजके काम रोज निपटानेके आदी है,

      मोदीके भाग्यमें ऐसी सारी सब अनुकुलता हो रही है उसके पीछे क्या राज है? एक सामान्य स्वयंसेवक आज देशका प्रधानमंत्री बनने जा रहा है, उसको पुकारनेकी जरूरत कर शके ऐसा कोइ नहीं है, मोदीको अवरोध शके ऐसा कोइ नजर नहीं आता है, ऐसा लगता है की मोदीके सीवा अब भारतमें प्रधानमंत्री पदके लीये ओर कोइ भी नहीं है, वैसे आजके माहोल और मोदीकी लोकप्रियता की उभर अही बाढको देखते हुए ऐसा लगता है की प्रधानमंत्री पदके लीये मोदी बिनहरीफ लोकनेता है, मोदीके कारन भाजपा केन्द्र सरकारमें सता पर आयेगी, भाजपाके कारन मोदी प्रधानमंत्री बनेगे ऐसा भी कहा नहीं जाता है,

      देशभरमें नरेन्द्र मोदी के लीये ऐसा एक तरफा माहोल कैसे बन चुका है, मोदीकी लोकप्रियताका ग्राफ हर मीनीट पर लगातार उपर ही उपर क्यु जाता है? मोदीके सामने अवरोध करनेवाला अंधेरेमें खो जाता है, मोदीके काफी विरोधी भी आज मोदीके प्रशंषक एवं समर्थक बन चुके है, ऐसा क्यु हो रहा है? ऐसे संजोग क्यु पैदा हो रहे है? मोदीने ऐसा क्या कीया होगा की आज देशके हर घरसे मोदीके समर्थनमें आवाज उठ रही है , हर कोइ मोदीको चाहने लगा है,

      मोदीसे भी अच्छा मेग्नेटीक भाषण-वकत्वय देनेवाले बहुत लोग है,  मोदीसे ज्यादा बहेतरीन मार्केटींग करवानेवाले राजनेता भी है, टेकनोलोजीका प्रयोग करनेवाले टेक्नोक्रेटभी है, मोदीके पास जीतने वफादार है उनसे दस गुना वफादारोकी फोज मोदीके विरोधीओके पास भी है, फीर भी मोदी हर कदम पर बहेतरीन ही लगते है, मोदीके इस जादुका राज क्या है? कोइ राज नहीं है कोइ रहस्य नहीं है, सच क्या है वह जाननेके लीये कीसे आम अदमीके पास समय ही कहां है, सच और जुठके बीच कीसीको फर्क नजर नही आता है वही भी एक रहस्य ही है.

       मोदीकी सफलताका रहस्य.. आप सोचे.. समजमें नहीं आये, तो थोडा इन्तजार करे..(क्रमशः)

गांधीनगर, दिनांक- 21-09-13, (राज प्रजापति)                              

 

                                                   


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