Posted by: rajprajapati | 26/06/2012

मीठा सच—( कब्रस्तान में — अजान)

हमने कब्रस्तानमें दि है अजान….

               भ्रष्टाचार के खीलाफ अब देश जाग उठा है, (ख्वाब देखो)  लेकीन हक्कितमें ज्यादातर एकटीवीस्ट के पास कोइ सही दिशा नहीं है.. ऐसे तो भ्रष्टाचार कभी दुर नहीं होगा, यह तो केन्द्र सरकारमें बैठी कोंग्रेस और उनके साथी पक्षो के खीलाफ चल रही एक साजीश ही है. बाबारामदेवजी और अन्ना हजारे का जनआंदोलन तो सीर्फ भ्रष्टाचार के खीलाफ है भ्रष्टाचारीओ के खीलाफ नहीं है मतलब के यह सब का निशाना सीर्फ दिल्हीमें बैठी कोंग्रेसकी सरकार है.. भ्रष्टाचार दुर करना है तो सब से पहले भ्रष्टाचारीओ को तो निकालना जरूरी होता है..देश के सभी राज्योमें मुख्यमंत्रीओसे लेकर विधायक भी करोडो रूपीयोका भ्रष्टाचार कर रहे है. अन्नाजीऔर रामदेवजीने भाजपा शासीत  राज्योमें चल रहे भ्रष्टाचार के सामने कोइ आंदोलन चलाया नहीं है.

              गुजरातमें गौचर जमीनो और खदानोका बहुत भारी मात्रामें भ्रष्टाचार है कीसान और सभी अन्य लोगो के अधिकारो को कुचला जा रहा है, गुजरातमें गेरकानुनी बांधकाम करनेवालो की सहायता के लीये कानुन बनते है, गुजरातमें सविधान के नियमोको तोडने वाले और समान अधिकारोको तोडनेका कानुन पारीत हो रहा है, गुजरातमें भाजपा की सरकार है जहा भी भाजपाकी सरकारे है वहा जमीन और खदानोका भारी मात्रामें भ्रष्टाचार हो रहा है, भाजपाके मंत्री जेल में जा रहे है, अन्नाजी और बाबा रामदेवजीको सीर्फ केन्द्र सरकारमें बैठी कोंग्रेसके साथी पक्षोकी सरकारके कौंभाड ही नजर आते है.. भाजपा के राज्योमें चल रही लुंट की तरफ आंख मिचोली के जैसा कीया जा रहा है.

 

        भारत के सभी राज्योमें बेहद और बेरहमी का भ्रष्टाचार चल रहा है.. सभी राज्योमें मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रीमंडल, विधायक, सांसद, प्रधान, तहेसील के अध्यक्ष, पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान,  जहा जहा राजनिती से लोग आते है वहा वहा भ्रष्टाचार है, राज्योमें चल रहे अरबो रूपीयो के भ्रष्टाचार के खीलाफ अन्नाजी और रामदेवजी कोइ कोइ शिकायत ही नहीं है सीर्फ केन्द्र सरकार के सामने ही उसकी नाराजगी है..

        भ्रष्टाचार करके पब्लीक फंड की तीजोरी से बेसुमार संपति पैदा करनी है तो राजनिती में जुड जाना होता है.. आज राजनितीमें और राजकीय पार्टीओमें जुडे हुऐ कोइ शख्सीयत ऐसी नहीं है.. जो भष्टाचारी ना हो… राष्ट्रीय पार्टीओ के नेता सभी अरबपति है. सब सांसद अरबपति है.. विधायक करोडपति भी है, अरब पति भी है,  देशमें साफ शुथरे दिखते हमारे विधायको और सांसदोकी विदेशोमें होटेल- मोल मोटेल और दुसरी काफी संपतिया है.. हमारे राजनेताओ के बच्चे विदेशोमें ही सेटल हो रहै है शेयरबाझार. झवेरातका बाजार में खरीदीदारीका बडा हिस्सातो भ्रष्ट नेताओका ही रहता है.. शिक्षा धंधा हो या या चिकित्सालयोका कारोबार हो. सब धंधे का धंधा तो हमारे वोट पानेवाळे भ्रष्ट लोगोने तो कीया है, ह्मारे आम अधिकारो का धंधा करते है उसको हम मतदान देते है..

         हमारा देश तो सीर्फ लुंटने के लीये है.. भ्रष्टाचार करके हमारे नेता लोग उनकी ज्यादातर संपतिया विदेशोमें ही जमा करते आये है..बाबा- रामदेव कहेते है की काला धन वापीस लाना है. तो वो रामदेवजी और अन्नाजी से यह कभी मुनकीन नहीं होगा क्युकी काले धन वालोकी सहायता से ही तो यह सब अपना आंदोलन चला रहे है..

           सुकी डाल पर खडे हो के बागीचा बनाके सपना देशके भोले लोगो को दिखाना भी राष्ट्रद्रोह है. स्मशान में यज्ञ करवानेवाळे मंदिरोका द्रोह करते है..

          बाबा-रामदेवजी और अन्ना हजारेजी को राजनितीक लोग ही तो चंदा देकर काम पर बरकरार रखा जाता है, उनकी सारी व्यवस्थायें तो राजनैतिक लोगो और उनके व्यापारी लोगोने ही तो की है.

           भाजपा को प्रतिज्ञापत्र जारी करना चाहिये की उनकी सरकार दिल्हीमें बैठेगी तो सब से पहले वो जनलोकपाल और सभी राज्योमें लोकायुक्तो की नियुक्ती करेगें और छ महिने में ही कालाधन वापस लानेकी कारवाही करेंगे..

 

            बाबा रामदेवजी और अन्नाजी के जनआंदोलन में भाजपा और उनके साथी पक्ष सीर्फ  सहारा बनते है लेकीन कोइ देशकी जनता के सामने प्रतिज्ञापत्र जारी नहीं करता अन्नाजी और बाबा रामदेवजीका आंदोलन वास्तवमें तो चोरो को निकालकर लुंटेरो को बिठानेकी साजीश जैसा लगता है..अन्नाजी और रामदेवजीको सब से पहेले भाजपा से जनलोकपालका वचनपत्र लेना जरूरी है. अगर वो भाजपा के लीये भेदभाव नहीं रखते है तो.. कोंग्रेस जनलोकपाल नहीं लाती है तो क्यां भाजपा जनलोकपाल लाना चाहती है वो अन्नाजीको जानलेना जरूरी है.. कोंग्रेस को नीकाल कर भाजपाको बिठाये%गे तो क्याफर्क होगा.. क्युकी मोदी की गुजरात सरकारने 9 साल से लोकायुक्तको नियुकत नहीं होने दिया है जब हुआ तो उनके सामने सुप्रीमकोर्टमें कारवाही चलायी जाती है प्रवकता मंत्री कहेते है की हम सनिष्ठ प्रयत्न करेंगे..( लेकीन लोकायुकत की नियुकती नहीं होने देंगे)

            गुजरात के विधानसभा चुनावमें बाबा रामदेवजी और अन्नाजी को भ्रष्टाचार के खीलाफ लड रहै निर्दलिय और बिनराजकीय उमीद्वारोके लीये मतदान करनेका भी तो आंदोलन चलाना चाहिये.. दोनो को मील कर भाजपा और कोंग्रेअ के खीलाफ निर्दलिय उमीदवारो के लीये चुनाव प्रचार करना चाहिये.. जो अगर वो भाजपा के लीये कार्यरत ना हो तो…

          कोंग्रेसवालो की तरह भाजपावाळे भी नहीं चाहते है की जनलोकपाल और लोकायुक्तोकी नियुकती हो.. विदेशी बेंको से काला धन वापस लाय़ेंगे तो कोंग्रेस से ज्यादा तो भाजपा को ही नुकसान होना है.. कोंग्रेस से तो ज्यादा भाजपा के नेताओ का ही काला धन विदेशी बेंकोमें पडा है.. देशमें जीतने भी राजनैतिक दल है उसके सभी राजनेताओ का काला और पीला धन विदेशकी बेंकोमें ही है. कोइ नहीं चाहता है की.. काला धन की बात आगे बढे. जनलोकपाल और लोकायुक्तोकी नियुक्ति के खीलाफ तो कोंग्रेस से ज्यादा भाजपा को विरोध है भाजपा ही नहीं चाहता है की कोइ राज्यमें लोकायुक्त और जनलोकपाल हो..

            विदेशी बेंकोमें कालाधन जमा करने वाळे राजनेताओमें गुजरात के 3800 से ज्यादा एकाउन्ट होनेकी संभावना मानी जाती है दुबइ, केनेडा, औस्ट्रीलीया, आफ्रिका, यु.के., यु.ऐ.ऐस. और 145 से ज्यादा देशोमें भारतीय लोगोकी संपतिया है.. गुजरात के भ्रष्टाचारीओकी आफ्रिका के जंगलोमें खदानो की भी संपतिया है. गुजरात के पुर्व मंत्रीओ और विधायको, सांसदोकी काफी होटेल्स और मोटेल्स अमेरीका और दुसरे देशोमें है..गुजरातमें पीछले 20 बरसोमें सीर्फ 6.00.000 करोड का भ्रष्टाचार हुआ है वो सीर्फ राजनेताका ही कीया हुआ है.. अपने राज्यमें शिक्षा का धंधा बनाने वाळे सभी राजनेता के परीवार के बच्चे विदेशकी स्कुल कोलेजोमे पढते है.    

 

           आज यह सब इसलीये होता है की यह राष्ट्र एक कब्रस्तान जैसा है.कब्रस्तान में कीतनी भी अजान हो तो कोइ नमाज के लीये उठता ही नहीं है कब्रस्तान में सभी लोग मुर्दा होते है.. वैसे भारत एक कब्रस्तान है. भारत का आम आदमी गुलामी को ही आझादी मानता है. हमारे यहा कोइ मुसलमान है तो कोइ हिन्दु है.. कोइ शीख है तो कोइ इसाइ है.. लेकीन कोइ इंसान नहीं है ?  हम कमीनेपन को छोडना नहीं चाहते तो राजनेता लोग भ्रष्टाचार को कैसे छोड पायेंगे ? हमारी खुद की ही बदमाशी है की हम हंमेशा राजकीय पार्टीओ के भ्रष्टाचारीओ और गुन्हेगारो को ही मतदान करते है..

           अन्ना और रामदेव आंदोलन सीर्फ कोंग्रेस को हराने का ही आंदोलन बन गया है, कोंग्रेस और भाजपा हो या कोइ भी दुसरा पार्टी हो, कोइ भी भ्रष्टाचार दुर नहीं करना चाहता,  भ्रष्टाचार करके ही तो चूनाव जीते जाते है, राजनिती करके ही तो सता पायी जाती है.

        आज सब समजते है की भारत के लोग भ्रष्टाचार के खीलाफ जाग रहे है तो वो सीर्फ एक सपना है या तो एक चार दिन का चांद है.. बाकी जनता जागी हीं नहीं.. जनलोकपालके आंदोलन में एक रात को तो ऐसा लगता था की देशमें परीवर्तन आयेगा.. लेकीन एक दो दिन के बाद… दुधमें से  पानी जल गया और सब दहीं बन गया, बाद की हालत तो सब को मालुम है, अब बाबा-रामदेवजी अपनी संपतियो को बचाते हुए आंदोलन करते है, उनके लोग सभी राज्योमें जील्लोमें कार्यरत हुए है उनको भाजपा और आर.एस.एस के लोग और उनके दाता ही पैसा देकर उनके कार्यक्रमो को चला रहे है, रामदेवजी और अन्नाजी की और से कार्योक्रमो मे एक रूपीया दिया नहीं जाता है सभी राज्योमें स्थानिक लोग और भाजपाके लोग ही परदे के पीछे से खर्चका इन्तजाम करते है ऐसी चर्चा अब जोरशोर से चल रही है.

          हम हर कदम पर कर चुकाते है. सभी चीजो और सेवा के बदले कर देते रहेते है..हम जो भी चीज का इस्तमाल करते है वो सब पर 20 से ज्यादा बार कर भरा जा चुका होता है.. हमारा काम सीर्फ कर भरने का और भ्रष्टाचार करने वाळे राजकीय पार्टी के बदमाश उम्मीदवारो को मतदान करना ही होता है..हम सब जींदा है सीर्फ अपने मतलब और स्वार्थ के लीये. अपनी अपनी रोटी और दाल पकाने का ही हम शीखे है. हम सही में  इ न्सान ही तो नहीं है हम लोग तो जाती और बिराअदरीमें कोमवाद- जातीवाद से पलते हुए मुडदे है…

           हमारे सब के धर्म जुदा है हमारे संप्रदाय जुदा है..कोइ आंख से खाना खाता है.. कोइ नाक से खाता है कोइ कान से खाता है.. कोइ हाथो से चलता है कोइ पाव से सुंधता है.. कीसीका सर हाथी जैसा है..कोइ घोडे जैसा है.. कोइ हिन्दु है..कोइ मुसलमान है..कोइ शीख है.. हम सब जुदा है.. क्युकी हम सब एक धरती का अन्न खा के एक ही हवामें सांस भरने वाळे पशु ही है.. हमारे धरम जुदा है हमारा कोइ राष्ट्रधर्म नहीं है.. जो इन्सान होता है उसका राष्ट्रधर्म  होता है.. हम पढे लीखे बुद्धीमान है लीकीन सब से बडे मुर्खता निभाते रहे है.. हम लोकशाही की बातो से मन बहलानेवाळे गुलाम लोग है…

 

          देशमें 2 लाख से ज्यादा स्वयंसेवक दल भ्रष्टाचार के खीलाफ आंदोलन चला रहै.. छोटे मोटे 2 लाख संस्थानो के मुख्या लोग भ्रष्टाचार दुर करने के लीये कब्रस्तानमें अजान दे रहे है.. कोइ मुर्दा उठता ही नहीं है… कोइ बंदा खडा नहीं हो रहा है.. जो भी भ्रष्टाचार भगाने को चीखता है वो दुसरे की आवाझ सुनता ही नहीं है. वो हर एक चाहता है की सब मेरी बात माने और में कहु वैसे ही भ्रष्टाचार दुर करने की लीये लोग मेरे साथ चल पडे..

            जीसने कभी संसद का भवन देखा नहीं है.. केन्द्र सरकार और राज्य सरकार कैसे चलती है.. विधानसभायें कैसे चलती है वो जरा भी मालुम नहीं है वो सब भ्रष्ट लोगो से बनी संसद  और विधानसभाओ में पहोंचे बिना भ्रष्टाचार हटानेका सपना देखते है…सरासर बेवकुफीका यह मामला बनता जा रहा है..

            भ्रष्टाचार करनेवाळोको हटाये बीना भ्रष्टाचार दुर करने की बात ही जुठी है. जो लोग भ्रष्टाचार करते है वो भ्रष्टाचार करते रहेगें तो भ्रष्टाचार दुर होना तो बहुत दुर की बात है सीर्फ खयाली पुलाव है, भ्रष्टाचार दुर करना है तो विधानसभाओ और लोकसभासे सभी भ्रष्टाचारीओ को निकालना होगा, हम स्वयं अब राष्ट्रधर्म निभाना होगा. घर –घर में देशका संविधान प्रादेशिक भाषाओमें पहुंचाना होगा.. संसद और विधानसभा चलानेके नियमोको हमे सभी 18 वर्षिय नागरीको पढाना होगा.. हम हिन्दु या मुसलमान तो हमारी आत्मशक्तिका रास्ता है,  हम पहले एक इन्सान है  यह बात हमारे सभी बच्चे-बुढे के मन में बसानी होगी.

           जब तक हम सच का स्विकार नहीं करेगें तब तक तो कब्रस्तान में अजान और स्मशानमें आरतीयां होती रहेगीं जब तक भ्रष्टाचारीओको ही निकाल कर फेंकेगे नहीं,  तब तक भ्रष्टाचार को हटाना नामुनकीन है..जो जनजाग़ृती का जन आंदोलन चला रहे है वो सभी को सलाम.. लेकीन यह सब कब्रस्तानमें दी अजान जैसा हो रहा है ..उनका दुःख होता है…जब तक हम नहीं सुधरेंगे तो हमारे मतदान लेकर सता पे बैठे भ्रष्ट लोग कैसे सुधरेगें  ? ……..हमे राजनिती को छोडकर राष्ट्रधर्म निभाना होगा….हमारा देश हमसे पहेले हम ही अहम है..हमारा देश है तो हम है..हमे अब अपने आपको नहीं,हमारे राष्ट्र को प्यार करना है..

                 हमें अपनी जात-पात कोम आदीकी गुलामी छोडनी होगी, हम सब नाक से सुधते है.. कान से सुनते है, मुह से खाते है.. पैरो से चलते है.. भारतकी जमीन में पका हुआ अनाज खाते है.. हम सब एक ही है. हमारे बीचमें से मानवता के रीश्ते तोड कर भ्रष्ट राजनितीज्ञोने हमारे बीच दिवारे खडी की है. हम अपने आपको देखना है समान अधिअकरो को देखना है राजनितीज्ञो की गुलामी को छोडना है.. हमे अब खुद ही विधानसबह और संसद चालनी है,, कोंग्रेस और भाजपा को भी हमे छोडना होगा,,क्युकी हम सीर्फ  इन्सान है कोइ राजनैतिक पार्तीओकी भेंड-बकरीया नहीं है…

                 थोडे समय के बाद गुजरातमें विधानसभा के चुनाव होनेवाळे है हम सब को जात-बिरादरी. कोमवाद-जातीवाद को छोडकर राजकीय पक्षोके उम्मीदवारो को सता से नीकालाना होगा… हमे विकास नहीं प्रमाणिक प्रसाशन की जरूरत है हमें सलामत समाज व्यवास्थाओकी जरूरत है. हम कर भरते है उनके समप्रमाणमें सेवाओकी जरूरत है, हमे राजनितीको छोडकर निर्दलीय उम्मीदवारो को मतदान करकें सबसे पहले अपने राज्यो से भ्रष्टाचारीयो को नीकालना है..

               हमें लोकशाही की हत्या पापकर्म बंध करना है, एक बार जीसको मतदान कीया है उसको दुबारा मतदान करने से लोकशाही की हत्या होती है मातृभुमीका द्रोह होता है हमने राजनीतीज्ञोको बार बार मतदान करकें लोकशाही की हत्या की है हमने अपने को अन्न देने वाली मातृभुमीका द्रोह कीया है इसलीये आज सभी राज्य और देश मंहेगाइ और भ्रष्टाचार से त्रस्त है…. उठो मेरे देशवासीओ.. अपने आप चिंतन करो और दुबारा कीसी को मतदान नहें करनेका संकल्प करो.. प्रतिज्ञा करो के हम कभी दुबारा कीसी को मतदान करकें अपनी मातृभुमीका द्रोह नहीं करेंगे, लोकशाही की हत्या नहीं करेंगे. जय हिन्द, जय गुजरात..


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