Posted by: rajprajapati | 29/01/2012

लोकशाही के अखबारो की जिम्मेवारी कब अदा होगी ?

अखबारो की जिम्मेवारी कब अदा होगी ?

लोकशाही का चौथा स्तंभ कब आम जनता के लीये खडा होगा ?

 

हमारे भारत देश को दुनियावाले लोकशाही राष्ट्र मानते है लेकीन वास्तवमें हमारे देशमें कहीं परीवारोकी राजाशाही चल रही है,.. बहुमती राज्योमें कहीं परीवार ही राजनीति चलाते रहेते है जैसे की उनके परीवारकी जागीर है, वैसे तो हम सब जानते है की हमारे राष्ट्रमें लोकशाही है, लेकीन हमारे देशकी जनता को हंमेशा राजनिती के नुमाइदोने संविधान और राज्य व्यवस्थाओ की कार्यारीती से दुर रखा है, उनके कारण सरकार ही माइ –बाप होती है ऐसा समजकर देशकी जनता 63 सालो से राजनितीज्ञोकी गुलामी जेल रही है.

 

लोकशाही में चार स्तंभ है एक लोकसभा और विधानसभा के लीये जनता के चुने गये लोकप्रतिनिधिओका स्तंभ, दुसरा न्यायपीठका स्तंभ,.. तीसरा सरकार में सेवा में नियुक्त कीये गये कानून से तंत्र व्यवस्था चलानेवाले सरकारी मुलाजीमो का स्तंभ( सीवील सर्विस के राज्य सेवको का स्तंभ) और सबसे अहंम भुमीका वाळा और बाकी के तीनो स्तंभो पर जनता की और से तकेदारी बर्तनेवाळा अखबार जगतका स्तंभ…. ऐसे चार स्तंभ देशके संविधान के अनुसार राज्य व्यवस्थायें और राष्ट्र व्यवस्थाओ के लीये, जुलमीलकर, कार्यरत रहेकर, राष्ट्र के सभी नागरीको को समान अधिकारो से सुविधापुर्ण व्यवस्था देते है.

 

हमारे देशमें आज भ्रष्ट राजनिती से चलनेवाले दल अपने दल को सता मीले इस लीये साम-दाम-दंड और भेद निती से राजनिती चला रहे है, हम सब जानते है की सरकार बनानेका अधिकार सबसे पहेले आम नागरीक को मीला है नागरीक अपने मतदान का प्रयोग करके अपने मतविस्तार से अपना प्रतिनिधि चुनकर सरकार का गठ्ठन करते है.

 

अब बात तो यह बनती है की राजनैतिक दल हंमेशा अपने दल से ही उम्मीदवार खडा करते है मतदाता उसको ही मतदान देकर अपना प्रतिनिधि चुन लेता है हर आम आदमी ऐसा ही समज रहा है की सरकार तो सीर्फ राजनैतिक दल ही बना शकता है. इसी गलतफेमी के शिकार लोग ज्यादातर राजनैतिक दलो के भ्रष्ट उम्मेदवार में से कीसी एक को पसंद करके मतदान करके चले आते है.आम आदमी की गलतफेमी का पुरा दुर उपयोग हमारे राजनैतिक दल चलानेवाले परीवार करते रहे है,

 

यह सब क्यु हो रहा है ? क्युकी हर आदमी को या सभी मतदारो को सरकार की व्यवस्थाये कैसे चलायी जाती है उसके कानून से अवगत नहीं कराया जाता है, जब तक आम नागरीको को उनके संवैधानीक अधिकारो और देशके संविधान से पुरी तरह से अवगत ना कराया जायें तब तक हमारे देशमें कोइ ना कोइ दल चलाकर भ्रष्ट राजनेता सरकार बनाते रहेंगे .

 

आजकल हमारे देशमें पीछले एक साल से थोडे लोग भ्रष्टाचार के खीलाफ जन आंदोलन चला रहा है वह आंदोलनकारी लगातार एक ही दलकी सरकार के सामने अपने शस्त्र चलाते रहेते है देशमें कोंगेसके दल की सरकार चल रही है तो जनआंदोलन कारी लोग उनके खीलाफ लोगो को भडकाने का कार्य कर रही है.. देशमें कोइ राजनैतिक दल ऐसा तो है ही नहीं की जो बिना भ्रष्टाचार से चलता हो, सभी दलको जब जब सरकार बनाने का मौका मीला है तब दल के मुख्याओ और नेताओ नी आम जनताकी तिजोरी को चारो हाथो से लुंटा है,. क्युकी दल बदल करके भी भ्रष्ट नेता हंमेशा के  लीये अपना भ्रष्टाचार चलाते रहेते है.. जीसकी तरफ का चुनावी मौसम बनात देखते है उसके दलमें भ्रष्ट लोग आते-जाते रहेते है,.

 

यह सब चल रहा है और चलता ही रहे ऐसी हालत है,

 

क्युकी हमारे लोकशाही देशका चौथा स्तंभ हंमेशा राजनेताओकी चौखट पर हामी भरते रहेते है, लोकशाही के चौथे स्तंभ के लीये कोइ राज्य में अगर तो केन्द्र सरकारमें कोइ बजट ही नहीं होता है, अखबारो और न्युझ चेनल चलानेकी भी कोइ खास आचार संहिता भी नहीं है,.

आज देश के चौथे स्तंभ का हाल तो बदसुरत बना हुआ है, कीसीको भी अपना अखबार चलाने के लीये, अपनी न्युझ चेनल चलाने के लीये, जीतना भी पैसा चाहिये वो विज्ञापनो से पैदा करना पडता है, राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के बहुत सारे विभाग अखबारो को और चेनलो को समय –समय पर विज्ञापन देते रहेते है जीसके कारण लोकशाही का चौथा स्तंभ बाकी के चार स्तंभो को परेशान ना कर पायें.

 

देश के अखबार और चेनल नवेशो के पास भी भारत के संविधानका पुर्ण ज्ञान नहीं होता है, देश के आम जनता पे चलायी जानेवाळी व्यवस्थाके लीये प्रावधानमे रहे कानून का ज्ञान भी हमारे अखबारो के प्रतिनिधिओ के पास नहीं होता है, देश के राष्टपतिश्री, राज्यपालश्री, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, कलेकटर( डी.एम.) कमिश्नर, तहेसीलदार, मंत्रीमंडल, लोकसभा, विधानसभा, वेगेरे कीस कानून से चल रहै है, कीसके हाथमें कीतनी जिम्मेवारी है कीसके पास कीतनी सता है, कीसके उपर कौनसे कानून से काम चलाया जाते है वो सब कानून और अधिनियम होते हुए भी हमारे आम नागरीको को कोइ कानून और अधिनियमो का पता ही नहीं होता है, आम आदमी को पता नहीं होता है और सबसे बडी बदनसीबी तो यह है की ज्यादामात्रामें अखबार और न्युझ चेनल चलानेवाळे संपादको और प्रतिनिधिओ को भी ऐसी कोइ जानकारी नहीं होती है, हमारे राजनैतिक दल से चलने वाली सरकारोने ऐसी बातो को हंमेशा आम आदमी से दुर ही रखा है,. विधानसभायें और संसद कैसे चलायी जाती है वो सब कानून सभी पत्रकारो और संपादको को मालुम होता तो भी कोइ दल अपनी मरजी से सरकार नहीं चला शकता,

आज देशमें हर बात के लीये हर काम के लीये हर कदम अप्र कोइ भी सरकार से जुडा काम होता है तो सीर्फ पैसा ही खर्च करना फरजीयात हो गया है. आज का मुख्यमंत्री भी दुसरे मुख्यमंत्री के पास कोइ काम करवाता है तो उसको भी कोइ ना कोइ तरीके से रीश्वत देनी ही पडती है.

आज हमारे लोकशाही में चल रहे भ्रष्टाचार और रीश्वतखोरी से देशका कोना कोना गंदा हो चुका है आम नागरीक को दो वकत की रोटी मुमकीन नहीं हो रही, क्वोलीफाइड ंनागरीकोको भी सही ढंगका रोजगार उपलब्ध नहीं होता है.. जो भ्रष्ट होगा वह ही रीशवत खोरी से अपना मतलब सफल कर शकता है.

जो भी हो रहा है वो हर आम आदमी जानता है लेकीन आम आदमी मतदान करके सारी जिम्मेवारी चौथे स्तंभ पर छोड देता है यहा बात उळटी हो जाती है, चौथा स्तंभ बाकी के तीनो स्तंभो के पीछे पीछे उनकी बातो और वारदातो को खबर बना बना कर एक के बाद एक एक को भ्रष्टाचार चलाने का मैदान बनाये जाता है,

 

अगर पूलीस चाहे तो मंदिर की चौखट से कोइ चंप्प्ल चुरा नहीं शकता है ( FILM – SHIGHAM)  तो अखबार चाहे तो देश के कोइ कोने में गलती से भी कोइ मुलाजीम और राजनेता हलका सा भ्रष्टाचार करने की हिम्मत ही नहीं कर शकता है.

 

देशके चौथे स्तंभ को अब देशके आम नागरीक तक सची बातो को सही तरीके से पंहुचाना चाहिये, अखाबरो को और न्युझ चेनलो को अपनी जिम्मेवारी और सता चलाने के लीये सही आचार संहिता बनानी होगी,

 

वैसे तो कोइ सही कामकाज नहीं मील रहा है तो कहीं बेकार लोग तीन रूपीये का स्टेम्प टीकट चीपकाकर अरजीपत्र देकर एस.डी.एम. के ओफीस जाकर संपादक और अखबार या न्युझ चेनल का संपादक या मालीक बन जाता है इस लीये आज हर शहरमें जऊरत से 50 गुना ज्यादा पत्रकार और 10 गुना ज्यादा संपादक और मालीक पैदा हो गये है.. “ कुछ नहीं कर शकते है तो चलो एक अखबार चलायें ” जैसी चौथे स्तंभकी हालात बनी हुइ है.

 

हमार अखबार आजकल धंधा बन गया है, तो राजनैतिक दल उसको मीडीया ( माध्यम) बना के आम जनता के उपर अपनी सता का हंमेशा माहोल बना शकते है, देशमें लाखो की तादात में अखबार, मेगेझीन के अलावा छोटी- मोटी लाखो पत्रिकायें रोजाना छपकर पस्तिमें चली जाती है इसलीये जब तक पढ लीया ना जाये तब तक अखआर रहेता है बादमें पस्ति का स्वरूप बन जाता है अखबार जगत जैसे ज्यादातर तो प्रिंटींग प्रेस का ही फर्ज निभा रहा है..

लोकशाही का चौथा स्तंभ माने जाली वाली सता के हाथमें एक के बदले एक भ्रष्ट राजनैतिक दलो को सता पर बिठाने का माध्यम बना रहेने के सीवा कोइ और जिम्मेवारी रहेती नहीं है..

 

तीन रूपीयो से अखाबर का नामांकन करनेवाले लाखोकी तादातमें है क्युकी अखबार के लीये अभी तक सही आचार संहिता बनायी नहीं गयी है आज भी अखबार केन्द्र और राज्यो के मंत्रालयो की पीछे पीछे अपना गुजारा कर रहा है..

 

जीसकी थालीमें लड्डु उसकी थालीमें हम जैसे चौथे स्तंभका हाल बडे अखबारो के कारण माध्यम जैसा बन गया है बडा अखबार चलाने के लीये हर दिनमें लाखो रूपीयो का खर्च होता है कागज से लेकर प्रतिनिधिओ की तनखा, बडी आधुनिक मशीने चलानेका महिनेभरका लाखो रूपीयो का खर्च नीकालने के लीये अखबार नवेशो को करोडो की आमदानी करनी पडती है वो सब सीर्फ सरक्युलेशन से या अखबार बेचने से नहीं मील शकता है विज्ञापन की आमदानी से कोइ अखबार चलता नहीं है, इसलीये बडे अखबार और न्युझ चेनल को विपक्ष या शासक दल के साथ रहेकर उनकी राजनितीका माध्यम बनना पडता है.

 

अगर लोकशाही के चौथे स्तंभ को पावर में लाना है तो देशके सभी अखबारो के लीये खास अधिनियम और कानून भी बनाने पडगे वो कानून सीर्फ मीडीया के दिग्गज ही बना शकते है सुप्रीम कोर्ट के निवृत जज की पेनल के साथ देशके न्युझ चेनल और बडे अखबारोके के संपादकोका (मालीको का नहीं ) एक गठ्ठन करके बनायी गइ समिती अधिनियम बना कर लोकसभामें पारीत कर शकते है.. जन लोकपाल के कानून बनाने में मीडीया ने ही अन्ना हजारे की टीम को मीडीयाने ही सारे देशमें आम आदमी का आंदोलन बनाया था.

 

मीडीया को अब सतामें आने की आवश्यकता है जीस तरीके से बाकी के तीन स्तंभोका सरकारो में बजट होता है वैसे हर सरकारमें मीडीया कर्मीओ के लीये भी बजट होना चाहिये जब तक देशकी चौथी सता अपने आप में एक नया आयाम लेकर एक जुट नहीं होगी तब तक राजनैतिक दलो का माध्यम बनकर सीर्फ कोइ ना कोइ तरीके से राजनेतिक दलो के पीछे लोकशाही के अपने पावर को बीगाडना होगा.

 

हमे आशा है की अब 65 साल के बाद अखबार के चौथे स्तंभ को सतामें आना जरूरी हो गया है. देशमें एक से बढ कर एक अच्छे कानून है सीर्फ उनका सही इस्तमाल करनेवाळे सरकारमें आये वो जरूरी है. आम जनता रोज, हर कदम पर टेक्स दे रही है उनके अधिकारो की सुरक्षा और पुर्तता करने का काम लोकशाही की चौथा स्तंभ ही कर शकता है.. ———————–

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RAJ  PRAJAPATI,.. special correspondent, Gandhinagar, GUJARAT.

09227661166/ 09925661166 / 09428661166 / 09924661166 / 09898661166

 

https://rajprajapati.wordpress.com /

 

girnarexpress@gmail.com /

 

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Thanks ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 

Regard……………………. 

 


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