Posted by: rajprajapati | 26/01/2012

भारत के संविधानमें सुधार करने का अवसर आ गया है.

भारत के संविधानमें लोकपाल और लोकायुक्त की नियुक्ति के लीये अब सही सुधार करने का अवसर आ गया है.

 हमारे संविधान में परीस्थीतीओ के मध्ये नजर रखते हुए लोकशाही मुल्यो के जतन और आम आदमी की अधिकारो की सुरक्षा के लीये संसद में कानन बनानेका प्रावाध्यान संविधानमें दिया गया है

अन्ना हजारे ने जन-लोकपाल के अनशन से लोकआंदोलन चलाया था..फीर भी जनलोकपाल के लीये गंभीरता से कदम उठाये गये नहीं है..

हमारा देश लोकशाही होते हुऐ भी बहुत सारे परीवार ऐसे है जो कीसी ना कीसी राजनैतिक दल से जुडे है और उनका परीवार हंमेशा लोकसभा और विधानसभाओ में होता है.. एक ही परीवार के दो – दो सदस्य एक साथे लोकसभा और विधानसभामें होता है.. इसलीये अभी तक लोकशाही की पुर्णरूप से स्थापना नहीं हो पायी है.

हम लोग जानते है की कोइ सरकार को अपने उपर लोकायुक्त या लोकपाल नहीं चाहिये, क्युकी लोकपाल और लोकायुक्त पुर्व न्यायधिश होते है, लोकपाल और लोकायुक्त संविधान और कानून के साथ काम करते है जब की राजनैतिक दलो से बनी राज्य इवंम केन्द्र की सरकारे भ्रष्ट राजकीय दल चला रहे है.. कोइ भी राजकीय दल को चलाने के लीये और चुनाव लडने के लीये करोडो- अरबो रूपीयो का खर्च होता है.. सभी राजकीय दल चुनाव के लीये और दल के कार्य चलाने के लीये जीतना भी खर्च करते है वो सब खर्च आम जनता की सरकारी तिजोरीमें से नीकाला हुआ भ्रष्टाचार का पैसा होता है..कोइ राजनेता अपने घर से तो पैसा लगाता नहीं है..

 जैसे देखो तो गुजरातमें आज भारतमें सबसे ज्यादा विकास हो रहा है.. लेकीन वास्तविकता तो यह है की गुजरात में सरकारी जमीने और गौचर की जमीने मुफतमें उध्योगपतिओ की दी जाती है उपर से बिजली- रास्ते और जरूरत हो तो राज्य की तीजोरी से करोडो रूपीयो की नकद मदद भी दी जाती है.. नरेन्द्र मोदी को भारतका प्रधानमंत्री बननेकी काफी बडी महात्वाकांक्षा है तो देशभर के 28 राज्यो में मोदी को अपना सीक्का जमाने के लीये और राजकीय नेताओ और कार्यकर्ताओ को खरीदने के लीये, लोकसभा चुनावमें होने वाळे लगभग 12000 करोड के खर्चकी नकद पैदा करने के लीये देश के प्रमुख उद्योगपतिओ को गुजरात की जनता की प्रोपर्टी मुफत में बांट रहे है.. यह सब नरेन्द्र मोदी की प्रधानमंत्री बन ने की महत्वाकाक्षा को पुरा करने के लीये कीया जाता है. हिन्दु और मुस्लीमो के बीच कोमवाद का तुफान खडा कर दिया और खुद राज्य के मुख्यमंत्री बन गये है बाद में झेड प्लस सलामति को बरकरार रखने के लीये आंतकवादी हमलोकी फर्जी घटना ये बनायी गयी है. देशभरमें आतंकवाद के सामने लडनेवाला एक ही आदमी नरेन्द्र मोदी है ऐसा दिखाने के लीये मुंबइमें हुए हमले के समय पर दिल्ही से सीधा मुंबइ पहुंचे थे लीकीन मीडीयावाळो ने मोदी को खास महत्व दिया नहीं था,.. अब सारा देश जानता है की मोदी सरकारने जीतने भी एन्काउन्टर करवा ये है वो फर्जी है मतलब की फर्जी आंतकवादी पैदा करनेका काम नरेन्द्र मोदी करता है या तो कोइ ना कोइ आंतरराष्ट्रीय आंतकी गीरोह के साथ नरेन्द्र मोदी का पुरा सपंर्क रहेता होगा.. देशभरमें सीर्फ नरेन्द्र मोदी को ही आंतकवादी मारने को आते है मुंबइ का शिवसेनावाला बाल ठाकर बर्षो से मुस्लीमो के खीलाफ है और आये दिन अपने आपको हिन्दु का सम्राट बताने के लीये मुस्लीमो के खीलाफ बकवाद करता रहेता है फीर भी कभी बाल ठाकरे को मारने के लीये कोइ आतंकवादी आता नहीं है और ना तो कभी आंतकवादी हमला होनेका इ-मेइल आता है.. दुनियभरमें एक मोदी ही है जीसको मारनेवाळे आंतकवादीओ को हर हप्ते इ-मेइल आते रहेते है.. मोदी के विदेशी दोस्त फर्जी लेपटोप से कोइ भी साइट हेक करके देशकी सुरक्षा एजंसीओ को मोदीको मारनेके लीये आंतकवादी देशमें घुस मार चुके है  वगेरे वगेरे वाले इ-मेइल आते रहेते है. 

अब सबसे अहम बात तो यह है की मोदी यह सब कैसे और क्यु कर शकता है क्युकी मोदी के उपर देखभाल करने के लीये गुजरातमें कोइ संविधानका नुमायंदा नहीं है. मोदीने विधानसभामें उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने दी है तीन तीन दंडक होते है उपाध्यक्ष नहीं होते है उसी तरह गुजरातमें जब से मोदी की सता चली है तब से लोकायुक्त की नियुक्ति भी नहीं हुइ है..

क्युकी संविधान में जो प्रावधान्य है उसका सबसे बडा दुर उपयोग नरेन्द्र मोदी करते है.. राष्ट्रपति और राज्यपालोकी तहत केन्द्र में सुप्रिम कोर्ट के निवृत न्यायधिश को नियुकत करके हंमेशा के लीये हर तीन साल के लीये लोकपाल की नियुक्ति होनी चाहिये और उसकी नियुक्ति सीर्फ सुप्रिम कोर्टकी सात जजोकी समिती ही दो लोकपाल को चुनेंगे और राष्ट्रपतिजी उसमे से एक को लोकपाल के लीये नियुक्त करेंगे..

वैसे सभी राज्योमें भी उच्च न्यायलय के सात जजोकी समिती कोइ भी हाइकोर्ट

के दो निवृत जजो का सुझाव राज्यपाल को दीया जाये और उनमें से एक को तीन साल के लीये राज्यका लोकायुक्त नियुक्त कीया जायें .

लोकायुक्तो और लोकपाल की नियुक्ति में कोइ भी तरहका राजनैतिक दलो का या कोइ राज्य सरकार या केन्द्र सरकारके मंत्रीमंडलका हस्तक्षेप नहीं होना चाहिये.  राजनैतिक दलो की सरकारे बनती है तो कोइ राजनैतिक दल लोकायुक्त और लोकपाल चाहता नहीं है.

अब संविधान में लोकपाल और लोकायुक्त की नियुक्ति में से सरकारो के मंत्रीमंडलका कोइ हिस्सा नहीं होना चाहिये तब जाके सरकारे भ्रष्टाचार करने से डरती रहेगी.

दुसरा संविधानमें एक महत्वका सुधार यह भी होना आवश्यक हो गया है की लोकसभा और विधानसभामें कोइ नया कानून बनाने के पहेले उससी सबंधित राज्यकी आम जनता का जनमत भी लीया जाये. जनमत दो तीहाय ना होतो कोइ कानून लाना ठीक नहीं होता है आज हमारे देश का एक दो आदमी की जो मंत्री होता है वो या राज्यका मंत्रीमंडल चाहे तो कोइभी कानून बना शकता है. हमारे संविधानमें विधानसभा और लोकसभा तथा राजसभा को कानून सुधारने का जो प्रावधान है उसका राजनैतिक कारणो से दुरउपयोग करना अब फेशन बन गया है..

हमारे देशमें हर घरमें जब तक हमारा संविधान नहीं पहुंचेगा तब तक कुते जैसे राजकीय दल हमारी जनता की तिजोरीया नोचती रहेंगी..

लोकपाल और लोकायुक्त के लीये संविधानमें जरूर्री सुधार लाया जाये वो समय की और देशमें फैले हुए बहुत भारी मात्रामें भ्रष्टाचार को रोकने के लीये जरूरी हो गया है .  


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