Posted by: rajprajapati | 03/10/2011

लोकशाहीकी हत्या और भ्रष्टाचार का समर्थन.

एक आदमी को दुबारा मत देना लोकशाहीकी हत्या है और भ्रष्टाचार का समर्थन है,.

हमारे देशमें धीरे  धीरे भ्रष्टाचारके सामने लोकजागृती आ रही है..

अन्ना हजारेजी के साथ सीवील सोसायटी के साथीओने भ्रष्टाचार के सामने एक नयी जनचेतना का प्रारंभ कीया है, अब हमारे देशके लोगो को परीवर्तनकी नयी दिशा नजर आने लगी है,

16 दिसम्बर के बाद भ्रष्टाचार के बारे हमारे विचारोमें परीवर्तन आया है..

लेकीन हम आज भी अपने पुराने भ्रष्टाचारीओ के पास प्रमाणिकताकी आशा करते है वो निहायत मुर्खता है,

आज जो लोग बर्षोसे हमारे देशके राज्योइ और देशकी सरकार चला रहे है वो लोगोने तो हमारे देशमें भ्रष्टाचार और रीश्वत को एक व्यवहार बना दीया है उसके पास हम प्रमाणिकता की आशा करते है तो वो मुर्खता ही है,..

हमारा देश दुनियाका सबसे बहेतरीन लोकशाही देश माना जाता था क्युकी हमारा देश बिनसांप्रदायीक है हमारे देशमें दुनियाके सभी धर्मो को सन्मान दीया जाता है.. फीर भी आज सारा देश धर्म और राजनीतीके नाम पर बिखर चुका है..

देशका कोइ राज्य और ऐसा नेता नहीं है जीसने अपने सताकालमें छोटा-मोटा भ्रष्टाचार ना कीया हो.. जीसने भी भ्रष्टाचार की शरूआत की है वो वही लोग है जो दुबारा मत लेकर के विधानसभा या लोकसभामें चुने गये हो.. देशमें बहुधा परीवार ऐसे है की जीसके घरमे कोइने कोइ हंमेशा विधानसभा या लोकसभामें सद्स्य होता है जैसे के लोकशाही के नाम पर उनकी ये जागीरदारी बनी है.. उनके लीये उनके क्षेत्र के मतदाताओका दोष है.

कीसीभी नागरीक या उनके परीवार के सदस्य को आप दुबारा मतदान करेंगे तो वो उनको हंमेशा के लीये अपनी जागीर समजने लगते है.

हमारे देश के सभी राज्यो और दिल्ही की संसदमें बहुत सारे लोग ऐसे है की मानो के उनके लीये ये लोकशाही हीं नहीं उसकी वंशपरंपरागत जागीरदारी हो.. अगर कीसीको भी दुबारा मतदान नहीं दीया जायेगा तो कभी भ्रष्टाचार होगा नहीं,

लोकशाहीमें सरकारे चलाने के लीये कोइ अनुभवकी जरूरत नहीं रहेती है.. हमारे स्वर्गस्थ पुर्व प्रधानमंत्रीओ और राज्यो के स्वर्गस्थ मुख्यमंत्रीओ में से बहुत सारे अब नहीं है तो क्यां देश का या कोइ राज्यका व्यवहार खत्म हो गया है या कोइ राज्यमे सरकार बन नहीं पायी है एसा हुआ है.नहीं हुआ है,.. आज जितने भी लोग लोकसभा और राज्योकी विधानसभाओमे सदस्य है उनको हमारे देशकी जनता अब कभी भी दुबारा मतदान नहीं करेगीं तो भी 80 प्रतिशत भ्रष्टाचार बंध हो जायेगा,

एक तरफ हम उनको बार बार मतदान करके सता पर बिठाते रहेते है ज्यादा से ज्यादा भ्रष्टाचार करने का अवसर प्रदान करते है ओर दुसरी तरफ हम भ्रष्टाचार बंध करेने की फरीयादे भी करते रहेते है ..हमारी इसी मुर्खता को वो सब मिलजुलकर बडा फायदा उठा रहे है..

देशकी कोइ भी सरकारे चलाने के लीये जरूरी सारे कानुनकी व्यवस्थाये है.. लोकसभा और विधानसभाये चलाने का नियम है तो हमारे देश में जीतनी भी सरकारी पोस्टींग है और जीतनी भी लोकप्रतिनिधिनिओके होदे है उनकी सतायें और जिम्मेवारीयों के भी कानुन है.. देश के सारे नेताओ को एक साथ नीकाल दिया जाये तो भी देशकी सरकारे बनती जायेगी और पहेलेसे अच्छी सरकारे चलेगीं..

अब मुजे ज्यादा तो कुछ नहीं कहेना है.. बस इतनी प्रार्थना है की अगर आपको एक ही आदमी को या उनके परीवार के सदस्य को कोइ ने कोइ जगा के लीये दुबारा मतदान करना है तो आप भ्रष्टाचार की बाते करना ही बंध करदे.

जब तब हमारे देश के बहुमती नागरीक ये बात नहीं स्वीकारेगें तो कभी भी भ्रष्टाचार दुर नहीं होगा.. भगवान श्री कृष्ण, भगवानश्री राम, और महात्मा गांधीजी भी हमारे देशमें फीर से जन्म लेंगे तो भी जब तक हमारे देशका आम नागरीक राजकारणीयोके पीछे चलना बंध नहीं करेगा और राजनीतीज्ञ पक्षोके उम्मेदवारो को मतदान करना बंध नहीं करेगा तो कभी कभी भ्रष्टाचार बंध नहीं होगा..

हमे अब भ्रष्टाचारी को सुधारने का जुठा प्रयत्न छोड कर अपने आपको सुधारना जरूरी है.. जब तक हम नहीं सुधरेंगे तो जो निहायती बदमाश और भ्रष्टाचारी है वो कैसे सुधर जायेंगे..


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