Posted by: rajprajapati | 02/07/2011

आत्मविलोपन और अनशन का सत्याग्रह.

आत्मविलोपन और अनशन का सत्याग्रह.

ह्मारे भारतदेशकी प्राचिन परंपरा रही है की अपने लीये या तो समाज की कोइ व्यवस्था के लीये न्याय पा ने के लीये लोग प्रचलीत स्थल पर अपना सत्याग्रह को अनशन करके जाहीर करते है ….

माना जाता है की अनशन में कोइ आध्यत्मिक शक्ति होनी चाहिये.. क्युकी अनशन का प्रभाव सबसे अधिक होता है. अनशन करके न्याय मांगनेवाला अपने ही आत्मा से फरीयाद करता है ऐसा लगता है..

अनशन ज्यादातर तो जीसके पास जरूरत के हिसाबसे धनराशी नहीं हो और अधिकारो के लीये लडनाभी जरूरी हो तब अनशन का शस्त्र चलाया जाता है…

अपने अकेले के लीये न्याय मांगना होतो अनशन का प्रयोग कारगत होता भी है… फरीयाद सुन ली जाती है.. न्याय मीले ना मीले उसकी परवा नहीं होती है.

थोडे समय से देश के काले धन और लोकपाल की नियुक्ती के लीये अनशन का प्रयोग कीया जा रहा है.. गांधीजी ने अनशन का बहुत सहीं मायने में सही समय पर आवश्यकता को समज के बहुत बार अनशन का प्रयोग करके. हमारे देश को आझादी दिलायी है…

आजकल हो रहे अनशन के प्रयोग का जनसमाज में कोइ खास समर्थन मीलता नहीं है. जो समस्यायें देशकी जनता को असरकर्ता है उसके लीये भी जनसमाज आज जागृत नहीं है.. कालधन की बात हो या.. लोकपाल की नियुकती की बात हो..जनसमाजमें उसके लीये पुरी जागृतता आयी नहीं है. इसलीये उसको अखबारो के माध्यम से लोग जानकारी रखते है और वाह – वाह करते है…

गांधीजी का कोइ भी अनशन होता है तो अंग्रेज हुकमरान भी उसको सन्मान से देखते थे गांधीजी  कोइ भी प्रश्न के लीये पहेले पत्र से बातचित करते थी आम जनता को भी पुरी तरह से जानकारी से जागृत रखते थे. बाद में प्रसाशन से जब बातचित का दौर पुरा होने के बाद सत्य का स्विकार नहीं होता था तो सभी लोगो से बात करने के बाद अनशन पर बैठते थे.. गांधीजी अनशन पर बैठते तब वहा का अंग्रेज अधिकारी भी उसको सन्मान देते थे..

नियमित और खास दिनो में कीये अनशन से शरीर की “ औरा “ भी बहुत बढती और फैलती है आदमी का व्यकतित्व प्रभाव बढता रहेता है

अनशन करने वाले की भी लायकात होनी जरूरी है…

अनशन करके न्याय मांगने वाला अपने जीवन में सत्य का पालन करनेवाला होना बहुत जरूरी होता है.. अनशन करने वाला अपने प्रश्न के लीये पुरा जानकार होना चाहिये.. अनशनकरने वाला अपने न्याय के लीये  जो मांग है उसके प्रति अखंड होना चाहिये.. सत्य की कोइ भी बात के लीये कीसीसे भी कोइ समजोता करने वाला या कोइ एक तरफ का कीसीका भी एकतरीफा समर्थन लेने वाला नहीं होना चाहिये.. जो समस्या के लीये या जीस बात के लीये अनशन कीया जाना है वो कार्य प्रवर्तमान कायदे कानून से हो शके ऐसाभी होना जरूरी है. जो कायदे कानून से भी ना हो शके उसके लीये कानून बनाने का जीसको अधिकार प्राप्त हो ऐसे प्रसाशन के सामने पुरी जानकारी को मुहया कराने का बाद अनशन का प्रारंभ करना चाहिये…

अनशन एक बार प्रारंभ हो जाये तो जब तक जो सत्य के लीये न्याय मांग रहे है वो सत्य का पालन ना हो तब तक अनशन जारी रहेना चाहिये… बिच मे से उठ खडे होने वाले लोगो के अनशन का कोइ फायदा नहीं होता है. अनशन एक बहुत उंचा व्रत है जो बिच में से व्रत को तोडता है वो कभी सफल नहीं हो पाता है..

हम सब बहुत बार अखबारो में पढते रहेते है  न्याय ना मिलने पर कोइ आत्मविलोपन की चेतावनी देता है.. बाद में आत्मविलोपन का प्रयत्न भी करता है तब पुलीस उसको गिरफतार कर के उसके सामने फरीयाद दर्ज करती है..

कोइभी न्याय मांगने के लीये अनशन करता है या आत्मविलोपन का प्रयत्न करता है तो क्युं ? करता है ? उसको कंहीन कही अन्याय हुआ होता है और कीसी न कीसी प्रसानिक अधिकारी की उसके लीये जीम्मेवारी होती है.. कोइ भी शौक से तो आत्मविलोपन करता नहीं है जो भी आत्मविलोपन करने का प्रयत्न करता है उसको अन्याय करने वालाको गिरफतार करना चाहिये.. आत्मविलोपन करके जो अपनी किंमती जींदगी का बलिदान देता है उसका क्यां गुना है.. अपने अधिकार के लीये लडना उसका संविधानिक अधिकार होता है.. कीसी को अन्याय होता है तो वो प्रसाशनिक तौर पर ही होता है तो जो उसके लीये जिम्मेवार हो उसके सामने कानून काम चलाना चाहिये..लेकीन उल्टा हमारे देशमें न्याय मांगने के लीये अन्याय से त्राहिमाम होकर कोइ अपनी जींदगी का बलिदान देता है उसको सजा दी जाती है.. आत्मविलोपन करने का विचार गलत विचार होता है…

मुजे यहा पर लीखना तो नहीं चाहिये लेकीन फीरभी सत्य तो यही है की जो अन्याय करता है उसका पहेले बलि चडा देना चाहिये बाद में आत्मविलोपन करना चाहिये.. जींदगी बहुत किंमती है ..कभी उसकी किंमत आंकी नहीं जाती है.. कीसी के अन्याय का भोग बनकर खुद की बलि चडा ने से अच्छा है की अन्याय करने वाले का बलि चडा दिया जाये.. क्युकी अन्याय करनेवाला रहेगा तो दुअसरो को भी अन्याय तो करता ही रहेगा..इस लीये सही तो ये है की अपनी जींदगी को खत्म करने के बजाय अन्याय करने वाले को खत्म करके जेल में रहेकर सन्यासी जैसा जीवन जीना चाहिये..

अनशन करनेवाले भी बिना सोचे समजे अनशन पर बैठे जाते है बाद में समजाने के बाद या उसको न्याय दीया जायेगा ऐसा विश्वास दिलाने के बाद वो अनशन करने वाला घर चाला जाता है. और बात फिर लंबी होती जाती है.. मतलब के काम तो होना ही था लेकीन उसके लीये कीसीको खेल करने की आवश्यकता थी..

न्याय भीख के तरीके से तब मांगा जाता है जब समने वाले इंसान के तौर तरीके वाले हो..जब बदमाशो के पास से न्याय मांगना हो तो हाथ जोडकर न्याय नहीं मिलता है.. कुतो को भगाने के लीये दंडा ही होना चाहिये.. न्याय जब बदमाशो से लेना हो तो भीख की तरह कभी न्याय नहीं मिलता है..

अनशन तो मै समजता हु की सभी को हप्ते मे एक दिन के लीये सभी को करना चाहिये.. अनशन से शरीर को फायदा होता है.. एक हप्ते में 14 से 15 बार हम लोग सामान्यत खाना खाते है उसके कारन हमारा पाचनतंत्र भी बहुत कार्यशील रहेता है और खुराक का जम गया हुआ बहुत सारा माल अंतडीयोमें भरा रहेता है.. शुध्ध जल का पुरा दिन प्रयोग करके कोइ भी खुराक को खाये बिना एक दिन अनशन करने से शरीर की शुध्धी भी हो जाती है और अंतडीयोमें भरा खुराक भी शरीर से बहार निकल जाता है.शरीर शुध्ध रहेता है तो मनभी अपने आप शुध्ध होने लगता है.. विचारो मे भी बदलाव आता है आत्मशक्ति का बढावा होता है….

हफ्ते में एक दिन का मौन और एक दिन का अनशन शरीर और मन की शुध्धी के साथ साथ आयुष्य को भी बढाता है… बिमारीयो से बचाता है… जो एक दिन का मौन और एक दिन का अनशन करता है वो इन्सान की जींदगी की समस्यायें अपने आप दुर होती जाती है. जीसको पोझीटीव कहेते है ऐसी विचारधारा बन जाती है…

अनशन का और मौन का प्रयोग आप करके देखो….

 जो अनशन करता है और मौन रखता है उसकी संकल्प शक्ति बहुत बढ जाती है नामुनकीन कार्य को वो सफलता से मुनकीन कर शकता है…

जो कार्य मुश्कील लगता हो उसको आसान करने की लीये भी मौन और अनशन का प्रयोग बहुत अच्छा होता है…

( नरेन्द्र मोदी को भी इसी की पुरी जानकारी है.. चैत्री नवरात्री के नौ दिन तक नरेन्द्रभाइ सिर्फ जल का प्रयोग करके नौ दिन तक अनशन करते है.. मोदी की संकल्प शक्ति और राजनैतिक सफलता का यही तो रहस्य है.. नरेन्द्र मोदी भी आम आदमी है.. हिरा मोती तो टके नहीं है.. उसने भारत के काफी राज्योकी यात्रा की है आध्यत्मका अभ्यासी आदमी है तो उसने बहुत सालो से अपनी इच्छाओ को सफलता से पुरा करने के लीये अपनी संकल्प शक्ति बढाते रहेने के लीये अनशन का सालो से प्रयोग जारी रखा है.. नियमित और खास दिनो में कीये अनशन से शरीर की “ औरा “ भी बहुत बढती और फैलती है आदमी का व्यकतित्व प्रभाव बढता रहेता है.)

 


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