Posted by: rajprajapati | 08/06/2011

भ्रष्टाचार से छुटकारा मिल शकता है ?

क्यां अब भ्रष्टाचार से छुटकारा मिल शकता है ?

नहीं मिल शकता,

जब तक देश के 40 फिसदी नागरीको को भारत के संविधान और प्रवर्तमान कानून का परीचय नहीं होगा तब तक कोइ बदलाव नहीं आ शकता, आज जो सत्याग्रह चल रहे है उसके कारन सीर्फ सरकार में राजनैतिक पार्टी का बदलाव आयेगा, तरीका बदला जायेगा लेकीन भ्रष्टाचार दूर नहीं होगा.

क्योंकी हमे वो रास्ता ही पता नहीं जीस पर हमे चलना है,जब हमे गंगा का पता ही नहीं है तो गंगाजल और सादा पानी में फर्क कैसे मालुम होगा..

भ्रष्टाचार भगानेका आजकल उबाल आया है…

जीसको चोर कहेते हो उसी को हम चोरी का माल वापस करने की मांग करते है तो कभी हम सफल नहीं हो पायेगें…

हमारे राष्ट्रमें कीतने लोग ऐसे है जो भारत के संविधान से परीचीत है ? हम सब को अभी तक ये समजमें नहीं आया की राज्यो इवं केन्द्र की सरकार कैसे चलती है ?

जो लोग अनशन करके देशमें जनक्रांति लाना चाहते है उसके पास सही दिशा का अभाव रहा है दोचार पावरफुल लोग साथ में आ गये तो अन्ना हजारे और रामदेवजी देश के भ्रष्टाचारीओ को सुधरन जाने का आहवान करने लगे है जीसने भ्रष्टाचार कीया है वो स्वयं अपने आप सुधर जायेगें वो बात ही हमारे लीये बडा भ्रम है.

वास्तवम में आज जो सरकार में है ऐसी राजनीतिके लोगो की सरकारो को हमे हटाना होगा, राज्य शासन चलाना कोइ ओटो रीक्षा चलाने का काम नहीं है सरकार बनाने और चलाने के लीये बहुत बडी तादात में वैधानिक नोलेझवाले लोगो की एक बडी सेना का गठन करना जरुरी होता है ऐसा कोइ शक्तिशाली गठ्ठन आज के सत्याग्रहीओ के पास नहीं है.

दिनांक 4 / 6 / 2011 की रात को 12:45 से 2:30 तक लोकशाहीं पर तानाशाहीका नाच हुआ था और सारा भारत देश इसे अपनी आंखो से देखता भी था, तो भी पुरे देशमें राजनीति के लोगो के अलावा कीसीने उसकी खास प्रतिक्रिया नहीं दी थी,

में स्वयं 4/6/2011 को दिल्ही के रामलीला मैदान में गया था वहा देखा तो भीड बहुत थी, इस भीडमें गांव के लोग ज्यादा नजर आते थे, स्वतंत्र दिमांग से सोच शके ऐसे लोगो का वहा कोइ दर्शन नहीं हो रहा था, …

लोकशाही राष्ट्रमें लोगो को सत्याग्रह करने से जबरन रोका जाये तो ये सच है की भारतमें सहीं में कोइ लोकशाही नहीं है.. रामलीला मैदान से बाबा रामदेवजी को औरत के लीबास में मुह छुपाके भागना पडे वो क्यां बता रहा ,,. बाबा के साथ कोइ ऐसे पावरफुल लोग नहीं है जो केन्द्र की सरकार और राज्य की सरकारो को सहीं तरह जिम्मेवारी से कानुनन जवाब दे शके और बातचित का दौर चला शके..

कपिल सिम्बलजी ने 4 तारीख की प्रेस  कोन्फरन्समें बाबा रामदेवजी के पतजंली योगपीठ ट्रस्ट के महामंत्री बालक्रिष्णाजी की एक चिठ्ठी देखायी वो चिठ्ठी सारे न्युझ चेनलोमें प्रसारित की गयी थी,. वो भारत जैसे राष्ट्र की केन्द्रीय सरकार को कानून में सुधार लाने की मांग को लेकर चल रहे सत्याग्रह के समजौते के तौर पर लीखी गयी थी..

आप सोचो की जो चिठ्ठी कपिल सिम्बलजी ने दिखायी वो कोइ वैधानिक भाषामें थी या नहीं थी, सब्जी मंडीसे आलु मटर और मीर्च मसाला लाने की लीस्ट बनायी हो या तो स्कुल से छुटी लेने के लीये टीचर को लीखी जाती कोरे कागज पर हाथ की लीखी चिठ्ठी जैसी इस चिठ्ठी ने सरकारमें बैठ्ठे बडे बुध्धीमानोमे हिम्मत बनायी थी, इसलीये तो वो लोगो ने बडे आराम से 60000 से ज्यादा सत्याग्रहीओ को 2 घंटेमे पुरे दिल्ही की सीमाओ से बहार खदेड दिया था,

कुते को लात मारने से कुता भाग जाता है इसका मतलब से नहीं के ह्मारी लोकशाही में राजाशाही चला रहे लोग बहुत सारे कानून से और भारत के संविधान से परीचित है.. अब ये सब जानते है की कपिल सिम्बलजी भारत के सर्वोच्च अदालत के जानेमाने लोयर है तो उसको कानून के शस्त्रो का अच्छा और बुरा इतस्तमाल करना बहुत अच्छी तरह से आता है…

बाबा रामदेव और अन्ना हजारेकी भावनायें अच्छी है लेकीन जीस लोगो के लीये वो ये सब करते है वो भारत की कीतनी जनता इसके लीये गंभीरतासे सक्रिय है..

दो घंटेमे 60-70 हजार लोगो को भगाने की हिम्मत उसको भारत के संविधानसे मिली है बाबा और हजारे को अभी ये समज में नहीं आता है की वो कीसके सामने अपना सत्याग्रह कर रहे है. जब तक ये सब सत्याग्रही का आपस मै समजदारी से एक होकर कोइ सही दिशामें एक निर्णय नहीं ले पायेगें तब तक भ्रष्टाचार जारी रहेगा.

बाबा रामदेव के पास और अन्ना हजारे के पास पुरे देशमें फैला हुआ कोइ कायमी संगठ्ठन नहीं है जो भी है उसको वैधानिक बातो के साथ कोइ लेना देना नहीं है, रामलीला मैदानमे हुइ वारदात के बाद बाबा रामदेव को सोचना जरूरी है की सरकार में इतनी हिंम्मत कहा से आयी है की उसने सच को ही कुचल डाला है,

भारत की संस्कृतीमें एक संन्यासी को महिला के कपडोमें मुंह छुपाकर भागना पडता है वो वारदात बताती है की अभी तक सहीं अर्थमें ह्मारे सत्याग्रहीओ के पास वैधानिक रूपसे बना कोइ संगठ्ठन नहीं है, जो है वो लोग पुलीस कोन्स्टेबल को सरकार का बडा पावर समजते है.. सरकार का हर मुलाझीम को पावर सीर्फ व्यवस्था बनायें रखने के लीये कानूनसे हाथ बांध कर दिये गये है फीर भी वो कानून को मरोड कर उसका भरपुर दुरउपयोग करते है जो दिल्ही के रामलीला मैदान में हुआ है वो सरकार का पावर कम है लेकीन सत्याग्रहीमें वास्तवमें कोइ देशा या योग्य मार्गदर्शक के अभाव ज्यादा है.. जो अफडातफडी हुइ थी वो ही पुरवार करती है की सत्याग्रहीओ को इकठा कीया जा शकता है लेकीन उनको सहीं दीशामें चलाया नहीं जा शकता है..बाबा रामदेवजी के पास पैसा तो बहुत है लेकीन सारे देशमें वैधानिक रूप से लड शके ऐसा संगठ्ठन बनाने की कोइ लंबे समय की योजना ही नहीं है…

हर तरह के कानून और संविधान से परीचित लोगो की एक सेना तो होनी चाहिये उनके साथ साथ हर समय को अपने से प्रभावितकर शके ऐसे लोगो की भी एक विद्द्वत सेना भी तो होनी चाहिये..बाबा रामदेवजी और हजारेजी के पास कोइ राजनितीज्ञ स्पोकन पर्शन ही नहीं है इसलीये वो अपनी मान्यताओ और अपने विचारो को लोगो के उपर ठोकते रहेते है,

सारा देश जानता है की भ्रष्टाचार हटाना कोइ सब्जी पकाने का काम नहीं है सब को ऐसा लगता है की बाबा रामदेवजी और हजारेजी देश में से भ्रष्टाचार हटायेगें, हक्क्ति मे भ्रष्टाचार आम जनताके व्यवहार में है.. चुनाव आने दो हमारे लोग कोंग्रेस, भाजपा, समाजवादी पार्टी, एन.सी.पी., डी एम.के., जैसी बहुत सारी भ्रष्ट राजनितीको ही अपना मतदान करेंगी,. जब तक मतदाता सरकार में राजनिती के लोगो को मतदान करती है तब तक भगवान भी भ्रष्टाचार हटा नहीं पायेगें,

हमारी कोइ खास जाती है, हमारी अलग अलग बिरादरी है, हमारी अलग अलग कोम है, हम सब एक दुसरे से जुदा है हम कभी एक हो नहीं शकते तो हमने जीसको मतदान करके राज चलाने दीया है उसको भ्रष्टाचार से कौन रोक शकता है ?

बाबा रामदेवजी और अन्ना हजारे के अनशन और सत्याग्रह से हो रही वारदातो से कोंग्रेस को थोडा नुकशान होगा 5-25 सीटो का घाटा होगा और दुसरी पार्टीओ को फायदा होगा, वास्तवमें चोरो की एक टोली को हटाकर लुंटेरो की दुसरी टोली को हम बैठा शकते है, कोइ राजनैतिक क्रांती आने की संभावना नजर नही आती,

आज कल देखो तो कोंग्रेस और दुसरे राजनेता एक दुसरे पर कीचड उछाल रहे है. कुतो की तरह ही भोंकते रहेते है,,, सरकार गीर जाये ऐसा माहोल एक दिन के लीये बना था उसका कोइ राजनैतिक पार्टी फायदा उठा नहीं पायी, बाबा में आत्म विश्वास का अभाव है उसके कारन भारत बंध का ऐलान भी नहीं हो पाया था, बाबा के सत्याग्रह पर हुइ वारदात का फायदा उठाने की सब राजनैतिक पार्टीओ ने कोशिष कर ली है,, किसकी फायदा नहीं हुआ है,

अब बाबा और दुसरे राजनैतिक पार्टीओ की बातो से लगता नहीं है की इस हालात में भ्रष्टाचार निकल शकता है,..समय है तो लोग कोइ ना कोइ वारदात को अंजाम दे रहे है,

आप और हम जब तक राजनैतिक पार्टीओ के उम्मीदवारो को जात-पात और कोम के नाम पर मतदान करते रहेंगे तब तक कोइ भ्रष्टाचार दुर नहीं होगा,

आप चाहे तो भ्रष्टाचार हटा शकते है..आप को इस सारी बातो को गंभीरता से सोचना है…


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