Posted by: rajprajapati | 02/06/2011

हमे अब तो सुधरना चाहिये.

आप को नहीं लगता है की भ्रष्टाचार के मामले मे अब तो हमे ही सुधरना चाहिये ?

 हमने कभी अपने आपको कोइ बात के लीये दोषी माना ही नहीं जो भी होता है वो अगर अच्छा होता तो वो हम अपने आप को उसमें सबसे आगे बताते है. और कोइ बात बीगड जाये तो हम कहेते है की मेरी बात नहीं मानी इसलीये ये ठीक से नहीं हुआ है…

वाह ……. क्यां बात है जो अच्छा है तो हमारा है. जो बीगडा है वो किसी और का है.

ये स्वाभाव हमे पळनेमें ही मील जाता है.

धीरे धीरे हमारे मन में अपना और पराया क्यां है वो संसारमें हमसे पहेले आये लोग हीं हमारे अंदर घुसा देते है वो मरते दम तक नहीं नीकलता है….

मेरी तो खास उम्र हीं नहीं सीर्फ चालीस साल हीं मैने संसार का अनुभव लीया हुं पलने में क्या हुआ वो पता नहीं लेकीन जबसे होश संभाला है तब से इतना मालुम हो गया है..की

जो भी है….. जो जागते है.. वो अपनी दमजदारी और पायी हुइ  शिक्षा का प्रभाव देखानके लीये बिस्तर में पेशाब करके अपने अनुभव का ढीढोरा पीटते है,पांच साल भ्रष्टाचार की फरीयाद करते है फीर भी मतदान तो कोइ ना कोइ भ्रष्टाचारी को हीं करते है.  

हम सच्चाइयों का समय पर स्विकार नहीं करते है तो बहुत समय से गलत चल रही सरकारो को हम स्विकारते आये है आज सबको महेगाइ और भ्रष्टाचार से दम नीकला जाता है….

जीतना बेवकुफ हम चुनाव के समय पर होते है उतना कभी नहीं होते….

आज की मंहेगाइ और भ्रष्टाचार चूनाव के दीन की हुइ बेवकुफी का नतीजा है…

चूनाव को लोकशाही दिवाली कहेते है.. फटाके की तरह लोग फुटते रहेते है….

चूनाव का माहोल शुरू होते ही हमारा दिमाग हम रेफ्रिजेटर में कूलींग करने रखकर हीं नीकलते है….

मै आप की बात नहीं करता, आप तो सहीमे बहुत समजदार हो.. जो वोट देते भी है और उनके प्यारे नेता भ्रष्टाचार करता है तो फरीयाद करते है. उसके लीये मुजे बहुत दुःख होता है..

बीचारे कीतने भोले है हमारे मतदाता.. चूनाव आते हीं सब को माफ कर देते है.. पीछली सारी फरीयादो को भुल कर उसी बेइमान को फीर से जीताते है.. वो चुनाव नहीं भी लडता है तो उसके बच्चे या बच्चीओ को मतदान करते है.. हमारे लोग आज भी मानते है की भ्रष्टाचारी को सुधरने का मौका देना चाहिये और उसकी बात पर भरोसा करना चाहीये.. आज तक वो हमारे नेता रहे है दुसरा नया लाये तो कोइ नया नेता कर भी क्यां शकता है.. कोइ बिना पार्टी का अकेला उम्मीदवार हम पसंद भी करे तो वो बीचारा एकेला क्या कर पायेगा ?

ये भी सही है जीसको पार्टी का समर्थन नहीं तो टीकीट नहीं मीलता है. हम तो पार्टीओ के गुलाम है.. पार्टी जीसको टीकट देती है उसको जीतायेगें,

क्या बीना पार्टी के उम्मीदवार हक्क्ति मे खुछ नहीं कर पाता ?

लोग समजते है की सरकार चलाने के लीये पार्टीया तो होती है,

क्या राजनैतिक पार्टी नहीं हो तो सरकार नहीं बन पायेगीं ?

हा थोडा सा ये भी सच है फीर भी नया गठ्ठन भी तो हो शकता है ना,  

अलग अलग मान्यताओ से आने वाले अकेले अकेले नेता से सही मे कुछ नहीं हो पायेगा, नये नेताओ का एक नया गठ्ठन बानाया जायेगा जो एक समर्थन में सामिल हो,

सच तो ये है की एक आदमी दुबारा चूनाव जीतकर सतामें आता है तब कुछ ही नही बहुत सारा कुछ कर पाता है, सरकारमें पैसा कैसे आता है और पैसा कैसे खर्च होता है.. सरकार कैसे चलती है… वो सामान्य नागरीक जानता ही नहीं तो बीचारा कहा से मालुम करेगा की सरकारे कैसे चलती है ?

सरकारे तो जो भारत का संविधान है उसके नियमो से बनाये कानुन से चलती है..

भारत लोकशाही राष्ट्र है तो सब से बडा धर्म ग्रंथ हमारे राष्ट्र का संविधान है. जो देश के सभी घरो मे उपलब्ध होना चाहिये… व्यवहारमें उपयोगमे ले जानेवाली सभी भाषाओ मे भारत का संविधान उपलब्ध होना चाहिये….

रामायण, महाभारत जैसे महाकाव्यो को हमने धर्म ग्रंथ के रूपमे स्वीकार कीया है तो हम भगवान को मानते है, उनके साथ साथ हमे अपने लोकशाही के धर्म को निभाने के लीये भारत के संविधान को भी स्विकार करना चाहिये, संविधान और उनके नियमो से बने दुसरे सारे कायदे कानुन हमे सुरक्षा और बहुत सारे अधिकार प्रदान करता है. इसलीये जैसे रामायण और श्रीमद भगवद गीता को, कुरान को हमने अपना धर्मग्रंथ माना है उनकी कथाओ और पठनसे हमारा आत्म विश्वास द्दढ होता है वैसे संविधान और कानून की जानकारी से हमारा सामाजीक और निजी जीवन भी बहुत सारे अधिकारोकी समज के कारन सुरक्षित होता है.

अब होता ये है की हम जैसे कर्म करेंगे वैसा हीं पायेंगे,

बहुत बार हमे गलतफेमी होती है ..की जो पापकर्म करता है वो बहुत सुखी और संपतिवान जीवन जी रहा है. ये गलतफेमी वैसे तो हंमेशा रहेती है..

हमारा जन्म भाग्य के हीसाब से होता है..जीवन भी भाग्य के हीसाब से मीले संजोगो में बहेता है.परंतु,

भाग्य से मीले संजोग और समय को हम अपना वास्तविक जीवन मानते है.. वो वास्तविक नहीं होता है. भाग्यसे मीलते संजोग और समय को समजना है.. जो सत्य को छोड कर कर्म करेगा तो उसका प्रारब्ध वैसा गलत ही होता है..

प्रारब्ध अर्थ है आनेवाला कल,

भाग्य का अर्थ है चल रहा संजोग.

भाग्य से संजोग की रचना होती है.. संजोगो को समजे बीना हम सत्य और असत्य का कर्म करके आगे का प्रारब्ध निर्माण करते है..

आज भारत मे जो चल रहा है वो भाग्य से मीली लोकशाही मे हमने कीये असत्य कर्मो का प्रारब्ध है…

हमारे जैसे बहुत सारे नागरीक जब पैदा हुए तब भारत कीसी और के शासन से मुकत हो चुका था हमारा अच्छा भाग्य बना के हमे बनी बनायी आझादी का भाग्य प्राप्त हुआ.

लेकीन हम सत्य को स्विकार नहीं कर शके…

हमने लोक्शाही को फीर से एक नयी गुलामी में धकेलना शुरू कर दिया..

हम सच जानते हुऐ सुधरे ही नहीं.

एक ही नागरीक को बारबर मतदान करके अपने अधिकारो की सता हमने दुसरो को दे दी, हमने कभी भाग्य से मीले राष्ट्रधर्म का सत्य के साथ चलकर पालन नहीं कीया है हम अखबारो मे रोज रोज बहुत सारे भ्रष्टाचार के कीस्से पढते रहेते है और दिनभर चर्चा करके भुल भी जाते है.

हमने जीसको मतदान दीया है अपना अधिकार भुगतने दीया है वो हमारा प्रतिनिधि सरकार चलानेमें कोइ ना कोइ रूपसे सामील है समाज में उसको विशेष दरज्जा दे रखा है. वो आदमी भ्रष्टाचार मे सामील नहीं हो तब भी उसके विरोधमें वो फरीयाद भी नहीं करता है उसका मतलब है की वो भी सब हो रहा होता है तब सबकुछ जानता भी है फीर भी सब बरबादी होने देता है तो हमे दुबारा उनको और उनके परीवार के दुसरे लोगो को मतदान क्यु करना चाहिये ?

कोइ नया आयेगां तो वो भी कायदे कानून से और संविधान के नीयम से ही सरकार चलायेगां सब को एक ना एक बार तो सब कुछ पहेली बार हीं करना होता है…नया भी सबकुछ शिख जाता है…

अभी तक आपने जो बात ठीक से पढी हो तो आप को नहीं लगता के हमे ही अब सुधर जाना चाहिये, हम नही सुधरेगें तो ये नेता तो कभी सुधरने वाले हीं नहीं है.

हमे अब ऐसी सरकार लानी पडेगी जो हर घरमें भारत का संविधान पहोचा शके. देशमें चलने वाले केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के कानूनो की पुस्तके हमारे देश के हर घरमें उपलब्ध करवाये,

अभी तक  कीसी पार्टी ने सामान्य जनसमाज को संविधान और चल रहे कायदे कानून को सामान्य नागरीक तक पहुचानी की बात नहीं की है.

कोइ राजनैतिक पार्टी वास्तवमें ये सोच भी नहीं शकती.

अगर देश के हर घरमें देश का संविधान और चल रहे कायदे कानून उनकी ही भाषाओ में पहुच जायेगा तो देश में कोइ भ्रष्टाचार कर ही नही शकता…

आज जो भ्रष्टाचार हो रहा है. वो आम आदमी के पास कायदे कानून और संविधान का ज्ञान नही होने के कारन हो रहा है…

आप सब को इतना तो पता होता है की जो भी पहेली बार लोकसभा या विधानमंडल का सदस्य बनता है उसको भी तो कोइ जानकारी नहीं होती थोडे महीनो मे धीरे धीरे वो भी सारे कानून के हथकंडे आजमाना शिख लेता है.

बहुत महिनो से भ्रष्टाचार के मुदे पर और लोकपाल के साथ सभी राज्यो में लोकायुकत की नियुकती के लीये अनशन और आंदोलन हुआ है..

केन्द्र सरकार उसके लीये नये नये उतर दीये जा रही है अभी भी बहाने बनाते है.

चाहे कीतना भी इमानदार लोकायुकत और लोकपालजी नियुकत होंगे तो भी भ्रष्टाचार में कोइ फरक नहीं होने वाला जो सरकारे चला रहे है वो बहुत संख्यामें है.. और लोकायुक्त और लोकपाल एक ही होते है.. उसके पास इतनी सारी मात्रा में व्यवस्थाये नहीं होती है की हर एक भ्रष्टाचारी को सजा दे शके.. वो भी नयी नयी जांच करते रहेंगे और नये नये फतवे निकाला करेंगे.. कोइ भी हुकम होने के बाद भी उसकी अमलवारी तो कोइ ना कोइ दुसरे से ही करवानी पडती है अमलावारी करनेवाला ही  भ्रष्टाचार करेंगा तो उसको कौन रोकेगा… लोकायुक्त और लोकपाल आम जनता के मन को बहेलाने के लीये अच्छी बात बनेगी.. लेकीन जब हक्क्तिमें लोकपाल और लोकायुकत  काम करेंगे तब कोइ ठोस परीणाम मिलने की संभावना बहुत कम है….

हमारे पास एक हीं आखरी रास्ता है की हम सब के घरो मे देश के संविधान और कायदे कानून इवं नियमो की पुस्तके का रोजाना पठन होना चाहिये, अगर देश का हर नागरीक संविधान से परीचित रहेंगा तो बहुत सारी जंजटे अपने आप पैदा होना बंध हो जायेगी…

भारत के 90 % लोगो को या ने मतदाताओ को ये पता ही नहीं की कानून बदलता रहेता है और हमारे चूने हुए भ्रष्ट नेता ही उसको अपनी जरूरतो की हिसाबसे समय समय पर तोडते मरोडते रहेते है…

संसद मे लोकसभा और राजसभा कैसे कैसे नियमो पर चलती है. विधानमंडल कैसे चलते है.. विधायक इवं सांसद कैसे कानून बदलते और नये बनाते रहेते है.. जो कानून भ्रष्टाचारीओ को फसाने के लीये होता है उसको ये लोग धीरे धीरे बदलते रहेते है….

आप गौर से अभ्यास करो तो हमारे देश में कोइ एक राजनैतिक पार्टी भी नहीं है..भ्रष्टाचारी लोग पार्टीया भी बदल ते रहेते है सब चूनावमें अलग अलग दीखाय पडते है आमने सामने लडाइ करते है फीर भी चूनाव के थोडे दिनो बाद सब मिल जुलकर ही अपना काम करते है.

आज तक कोइ विधानमंडल के सदस्य और सांसद ने अपने पहेले के या अपने साथ वाले कोइ सदस्य के सामने  उसके भ्रष्टाचार की जानकरी से कोर्ट मे या पुलीस में फरीयाद की है.. कोइ एक दुसरे के भ्रष्टाचार के सामने फरीयाद नहीं करता है.. दोनो ने नागरीको मतदान लीया है दोनो की जिम्मेवारी है की वो गलत ना होने दे.. फीर ही कभी कीसी ने भी दुसरे सदस्य के भ्रष्टाचार के सामने एक बार कुछ कहा भी नहीं है.. कोइ भी नेता सता में होता है तो और नही भी होता है तो भी, एक दुसरे बिना मतलब की आक्षेपबाजी करते रहेते है.. सब के सब मिले जुले रहेते है ..सब राजनेता जानते है की आज वो है तो कल हम भी आयेगें तो कोइ एक दुसरे का भ्रष्टाचार जाहीर ही नहीं होने देते है.

इस परीस्थीतीओ में एक हीं रास्ता है की कोइ भी एक बार मतदान लेता है तो उसको और उसके परीवार के सदस्यो को दुबरा फीर से मतदान नहीं मीलना चाहिये ना तो कोइ उसको मतदान करेंगा…

चुनाव की नियमो में और दुसरे सारे कानूनो में बहुत सारे सुधार करने जरूरी है.. सब जानते है क्या सुधार करना है फीर भी वो कोइ सुधार करने के बदले कानूनो को मरोडते रहेते है…

इसलीये तो अब हमे हीं अपनी पब्लीक की सरकार बनानी होगी..

आप इस ब्लोग में प्रगट कीये दुसरे लेखो को भी ध्यान से पढीये और विचार कीजीये की अब आप को क्या करना है….

आप के पास और मेरे पास और सब के पास एक ही रास्ता है..हम राजनैतिक पार्टीओ की सरकारो को हटा दे और अपनी बिना राजनैतिक दल की पब्लीक पार्टी का नया गठ्ठन करे..

तब हीं हम भ्रष्टाचार और दुसरी सभी समस्याओ का सही हल नीकाल पायेंगे….

आप इस बारे मे कोइ ठोस सुझाव देंगे तो हम भी आप के आभारी रहेंगे….

भ्रष्टाचार कीसी एक की नहीं ह्मारे सब की समस्या है…

हम अपने बच्चो और परीवार को कब तक भ्रष्ट व्यवस्थाओ में कैद करके रखना है ? …

आप को ही समय का सन्मान करते हुए..अपने आप उठ कर चलना है.. आप को दुसरो के सामने कोइ फरीयाद करनी की आवश्यकता नहीं है स्वयं ही नयी व्यवस्था बनानी है, और इसके लीये  

मुजे ,आपको और हम सबको अब सुधरना ही होगा…..

हम नहीं सुधरेगें तो वो भी कभी नहीं सुधरेगें .

अब समय की मांग है तो हम ही सुधर जाये तो अच्छा होगा…

जय भारत…

( ऐ मेरे वतन के लोगो जरा याद करो कुरबानी,.. जो शहिद हुए है उनकी ……)


Responses

  1. Vastvikta se paripurn…….yahi soch he meri………!!


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