Posted by: rajprajapati | 30/05/2011

स्वाभिमान सत्याग्रह

स्वाभिमान सत्याग्रह.

लोकशाही राष्ट्र का सबसे बडा ऐतिहासीक जनअंदोलन

भ्रष्टाचार कैसे दूर होगा…..? ऐसे होगा.

      जब आप घरसे बाहर आये और इस जन आंदोलन का नेतृत्व अपने आप स्वेच्छीकरूप से निभायेंगे.. हर घरसे एक आवाज उठनी जरूरी है.. ये देशकी जनता के स्वराज्य का सत्याग्रह है.. कोइ एक की लडाइ नहीं है आझादी के बाद सरकारे चलाकर लोकशाही को खत्म करने वाली राजनिती को उखाड फेंकने का ये महासंग्राम है. देश स्वतंत्र और प्रजासताक हो गया है लेकीन आम जनता आज भी राजनैतिक पार्टीओ की गिरफ्तमें कैद है.. आजभी हर चुनावमें लोग जानेमाने भ्रष्टाचारीओको ही वोट देकर भ्रष्टाचार का जाने अन्जानेमें स्विकार करते है….

      भारत की आझादीके 64 सालमें राजनितिके लोगोने देश को भ्रष्टाचार का अखाडा बना दिया है भ्रष्टाचारके खिलाफ आज भारतभरमें एक जनअंदोलन का प्रारंभ हुआ है नयी जन चेतना जागृत हो रही है बाबा रामदेवजी और दुसरे लोग उनके साथ में अनशन करके एक नया इतिहास बना रहे है.. आझादी के लीये सत्याग्रह के आंदोलनमें भी इतनी बडी संख्यामे अनशन का प्रसंग हुआ नहीं था फीर सोचनेवाली और करनेवाली बात तो ये है की क्या एक साथ देश के सभी राजनेता अपना पद त्याग दे तो भी भ्रष्टाचार के सामने खडे होनेवाले लोगोमें जनता से वोट पा सके ऐसा सामर्थ्य है ? और देश के राज्यो की विधानसभायें और संसद को चला शके ऐसा सामर्थ्य को जूटाना जरूरी है तो जो इस कार्य के अनुभवी है ऐसे नागरीको और सरकारी अधिकारीओ को इस आंदोलन को अपना समजकर बिना आंमत्रण सामील होना चाहीये

      भ्रष्टाचार दूर करने के लीये तो जो सरकारे चल रही है उसको हटाकर नयी सरकारे रचानी पडेगी आज सभी राज्योमे जो राजनैतिक पार्टीओ की सता चल रही हे उसको दूर करना होगा जो विधानसभायें चला शके संसद चला शके ऐसे नये प्रमाणिक लोगोको जुटाना पडेगा.. अच्छे लोग मिल भी जाये जो सरकार चलाने के काबील हो फीर भी सरकार बनाने के लीये देशभरकी विधानसभा और लोकसभा चुनाव को बहुमतिसे जीतना जरूरी हे सारे देशके बहुमति लोगो का जनसमर्थन हो और सारे लोग राजनैतीक पार्टीओ के विरोधमे मतदान करे वो भी जरूरी हे…इसलीये जीसके पास थोडा बहुत सामर्थ्य है ऐसे लोगो को इस लडाइमें सेनापति के रूपमें सामील होना चाहिये.

      देश के आम नागरीको के मनमे लोकशाही क्या हे ? उसका मतलब क्या हे ? वो समजाना और समजना जरूरी है .देश का संविधान और देश में चल रहे कायदे कानून की सारी कीताबे सभी भाषाओ में मुद्रीत करवा के घर घर पहोंचानी होगी…एक आदमी जीतनी भी चीजो और सेवाओ का उपभोग करता हे वो सारी सेवाओ मे से कीतना टेकस वसुल कीया जाता है वो हर आम आदमी को गीनती के रूपमें समजाना होगा, गांव की पंचायत के चूनाव मे दीये जाने वाले एक वोट की कीतना रूपीया किंमत होती हे ?, विधानसभाके चूनावमें एक वोट की किंमत कीतना रूपीया होती हे ? और लोकसभा के चुनावमे एक वोट की कीतना रूपीया किंमत होती हे ? वो देश के सभी मतदाताओ को बताना होगा… राजनैतिक पार्टीया पार्टी के लीये औए अपने घर के लीये पैसे कहा से लाते हे वो लोग उसके बदले मे देशकी सार्वजनीक संपतिको क्या दूर उपयोग करते हे वो सभी बातो से देश के सभी नागरीको को अवगत कराना जरूरी हे….इसलीये जो लोगो इस बात को समजते है और दुसरे को ठीक से समजाते शकते है ऐसे वकताओ की भी भ्रष्टाचार के सामने चल रहे आंदोलनमें आवश्यकतायें है तो देश जब ऐतिहासीक क्रांती के मोड पर आया है तो इस ऐतिहासिक अवसरमें समजदार लोगो को अभीयानमें सामील होना चाहिये.

      ऐसा नहीं हे की देशमें से भ्रष्टाचार निकल नहीं शकता कुछभी संभव हे लेकीन एक सही दीशा होनी चाहीये… असंभव तो कुछभी नही हे… जो लोग भ्रष्टाचार के सामने खडे हुए हे वो लोगो के पास अनशन करने के सीवा कोइ और रास्ता नहीं है तो ये बात गलत है अनशन करना एक पवित्र सकंल्प के लीये पहेला कदम है इसलीये अनशन को इस स्त्याग्रह में प्राथमिकता दी गयी है, सब मानते है की बाबा रामदेवजीने ये सब कीया है उसने कोइ एक सुनेहरे पलमें आये विचार को आम आदमी का विचार बनाया है और इस सत्याग्रह के बडे यात्री है. हक्क्ति तो ये है की हर आदमी आज भ्रष्टाचार से तंग आ चुका है तो से जनसमाजकी ही जरूरत है. बाबा रामदेवजी का अपना नीजी कोइ स्वार्थ तो नहीं है. बाबा रामदेवजी को प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बनना नहीं है.. ये सत्याग्रह सत्य का पालन करने वाले और प्रमाणिक नागरीको को सरकार चलाने के लीये मुकरर करने के लीये है.

      अन्ना हजारेजी ने लोकपाल के लीये सफल अनशन कीया, देशके लोगो का समर्थभी मीला लेकीन लोकपालभी प्रमाणिक होगा उसकी कौन गेरन्टी देता हे.. चोर- लुंटेरे अपने लीये सरदार चुनेंगे तो कैसा चुनेगे ? राजनिती से आये लोगो की सरकार लोकपाल और राज्योमें लोकायुकतकी नियुकती करे उनसे तो अच्छा यही होगा की हम ही सरकार बनायें और सही लोकपाल और लोकायुकतो की नियुकती करे.

 विदेशी बेन्कोमे भारतके भ्रष्टाचारीओका ૪૦૦ लाख करोड रूपीया काला धन पडा है ऐसा सब कहते हे की वो काला धन हे हक्कितमे वो धनही सफेद धन हे जो जमा पडा हे जो भ्रष्टाचारकी ऐय्यासीमे खर्च हो गया वो काला धन था.. सारा धन विदेशी बेन्कोसे वापीस लाकर क्यां करने का हे पब्लीक की अर्थात सरकार की तीजोरीमे वापस ही तो रखना हे ? अगर फीर से भ्रष्टाचार करने का मौका ना बने इसलीये जो सरकारी कामकाज की जानकारी रखते है और अनुभवी है ऐसे लोगो को स्वाभीमान के जन आंदोलनमें सामेल होना जरूरी है. नहीं तो विदेशी बेंको से काला धन वापस लाने का कोइ मतलब नहीं रहेंगा…..वो तो फीर से भ्रष्टाचार करके दुसरे राजनेता अपने खातेमें जमा करवायेंगे.. हमे वर्तमान राजनैतिक पार्टीओ की सरकारो से छुटकारा पाना सबसे ज्यादा आवश्यक है इसलीये सरकार के विभागो में काम कर चुके है ऐसे रीटायर्ड अधिकारीओ को नये नवजवानो को तालीम देने की लीये इस जन आंदोलनमें सामिल होना है.

      जब तक विधानसभाओ और लोकसभामे वही पुराने भ्रष्टाचारी रहेंगे या उसके परीवार के लोग सामील रहेंगे तब तक काला या पीला या हरा धन वापीस लाने का कोइ फायदा नहीं है… भ्रष्टाचार तो भगवान श्रीराम और भगवान श्रीक्रिष्ना भी आये तो दूर नहीं होगा क्युकी ये राजनेताओने भगवान के नामसे वोट लीये है और सरकारे बनाकर भ्रष्टाचार तो कीया है. हमे राजनैतिक पार्टी के भ्रष्ट नेताओ और उनके परीवार के लोगोसे देश को छुडाना है.  

      देश मे कोमवाद, जातीवाद और ज्ञातिवाद के इतने सारे कबाडे बने है की जातीवादी और कोमवादी भ्रष्ट मानसीकता को नीकालना सबसे बडा कठीन कार्यक्रम बनेगा….हिन्दु समाज और मुस्लीम समाज को अपने धर्मो की सही जानकारी देनी जरूरी हे कीसको सहीमें धर्म क्या हे वो ही समजमे आया नहीं हे.. अंधश्रध्धा का बडा कारोबार चलाके संप्रदायीक दिवारो में देशकी आम जनता कैद हे ऐसी प्रजा कभी एकजुट होकर देशमेंसे भ्रष्टाचार दूर नहीं कर सकती.. इसलीये संप्रदाय और कोम के धर्म की वास्तविक व्याख्यासे आम जनता को समजाना है… रास्ते चाहे कोइ भी हो आखरी मुकाम तो खुदा का घर है इसलीये सब को राष्टधर्म के प्रति कार्यवंत होना है. जो देश के प्रति, अपने माता पिता के प्रति, अपने गांव के प्रति अपनी क्या जीम्मेवारी हे वो जो जानते भी नहीं और नीभाते भी नहीं वो देशमें भ्रष्टाचार ना हो तो आच्श्रर्य की बात होगी….हमे सत्याग्रह का ये अंदोलन रोजाना व्यवहारमें अपनाकर हीं स्वराज्य बनाना है.

      नीजी स्वार्थ मे जुटे हुए लोगोसे ज्यादा क्यां उमीद की जायेगीं सब चाहते है की भ्रष्टाचार दूर हो जाये और नैतिकता औए प्रमाणिक तंत्र व्यवस्थाओ का राज बन जाये…लेकीन कोइ तन मन धन से खुद खडा नहीं होता, सब को बना बनाया रामराज्य चाहीयें , तो रामराज्य या स्वराज्य कभी नहीं हो पायेगा हमे हर घरमें राष्ट्रधर्म की गुंज उठानी होगी हर घर से एक आदमी को भ्रष्टाचार की खीलाफ इस आंदोलनमें सामील होना है…. सभी धर्म एक ही बात करता है की पवित्र रहो और पवित्र व्यवहार करो. हम सबका पहेला धर्म है की हम अपनी सर जमीन को वफादार हो जो जमीन हमे खाना को अन्न पैदा करके देती है उस जमी का हमपर बडा उपकार है तो सबसे पहेले हर इन्सान का धर्म अपने वतन के अपने राष्ट्र के प्रति है.

      देश के लोग अरबो खर्वो रूपीयो का टेकस भरती है उनके बदले में देशकी जनता को भ्रष्टाचार के सीवा कुछ नहीं मिलता है… आज ज्यादातर राज्यो में शिक्षा का धंधा हो गया है देशमें योजनाओ के नाम पर राजनैतिक पार्टीओकी सरकारे जनता का पैसा बिगाडते है और इसीमें से अपने धन राशी का भ्रष्टाचार करते रहेते है, इसलीये देशभरकी स्कुल-कालेजो के छात्रो और  देशके विविध संस्थानो में कार्यरत लोगो को भ्रष्टाचार के सामने आंदोलनमें सबसे आगे आना आवश्यक है इस सत्याग्रह देश के छात्रो और देश के युवाओ का है… देश भर के सभी छात्रो को एक मंच पर लाने के लीये बहुत बडा आयोजन जारी है तो देशमें कार्यरत सभी छात्र संस्थानो और संगठ्ठनो के अध्यक्ष और समितियो को तुरंत ही इस आंदोलनमें सामिल होना जरूरी है. देशकी जनता हर चीज पे टेकस भरती है तो उसके बदले में अच्छी से अच्छी शिक्षा हमारे देश के छात्रो को बिना खर्च के बिना मीले वो स्वाभिमान का एक खास उद्देश भी है. इसलीये देश के छात्रो और छात्र संस्थानो को जोडने की लीये बहुत मात्रा मे धन राशीकी जरूरत हे हमारा देश बहुत ताकतवर और मानवशक्तिओ से भरा है तो इस सत्याग्रह के जनआंदोलन को चलाने के लीये और इनकी बहुत सारी व्यवस्थाओ को निभाने के लीये बहुत सारी धन राशी की आवश्यकतायें है, वो धनराशी तभी मील शकेगी जब भ्रष्टाचार के खीलाफ खडे होनेवाले धनवान लोग अपनी मरजीसे अपनी आप थोडा बहुत खर्च निभाते रहे. राजनैतिक पार्टीया अपने भ्रष्टाचारी उम्मीदवारो को जीताने की लीये करोडो रूपीया खर्च करते है घर घर से वोट बटोरते है तो हमे भी घर घर से वोट भी लाना है तो उसकी बरोबरीमे खर्चभी तो होना है.

      भ्रष्टाचार से हंमेशा के लिये छुटकारा पाने के लीये हमे मतदान के साथ थोडा धन का दान भी करना है, अगर आपको या देशकी जनता को अपने सरकारी कार्य इवंम अधिकारो को पाने के लीये रीश्वत देने की जरूरत ना हो इसलीये आज भ्रष्टाचार के सामने चल रहे देश का सबसे बडे सत्याग्रह में सामील भी होना है और अपनी हैसीयत के हिसाब से थोडा बहुत दान भी करना है.

      ये सत्याग्रह अध्यात्मिकता की द्द्ष्टिसे तो एक महायज्ञ है सत्य के लीये और सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय के लीये प्रमाणिकता और नैतिक मुल्यो का ये महायज्ञ है.. आपका वोट जीतना किंमती है उतना हीं आपके दिये गये 1 रूपीये का मुल्य है.. रोज रोज की दाल रोटी कमाकर पेट भरने वाले गरीब के 1 रूपीये का मुल्य अरबपति से मिला 100000 से ज्यादा मुल्यवान होता है. ये सत्य का शासन लाने का देश का हर एक नागरीक इस महायज्ञ का यजमान है. देश के हर एक नागरीक को इस सत्याग्रह के महायज्ञमें 1 रूपीया ही सही लेकीन दान तो देना है. सर्वजन के सुखका यज्ञ तब हीं पुर्णरूप से सफल होता हें जब इसमें सब जन समाज का दान आया हो…

      अनशन करने से देशमें से भ्रष्टाचार दूर होगा वो बात ही  वैसे तो चुंटकुले जेसी हे हक्क्ति में अनशन का प्रयोग पवित्र संकल्प का बल प्रदान करता है द्द्ढ संकल्प के लीये अनशन सबसे जरूरी आयाम है रोजाना प्राणायम करते है इसी तरह ही देश के लीये सत्याग्रह का महा संकल्प लेने वाले सब अनशन करके शक्तिशाली संकल्प शक्ति का निर्माण करते है. देशमे आज सबसे ताकतवर संकल्प शक्तिकी आवश्यकतायें है तो लाखो लोग एक साथ अनशन करके पवित्र शक्तिओ का आवहान करते है,  हमे नयी शक्तियां जगानी है…. नयी दिशांये बनानी होगी..देश के घर घर में भारत के संविधान और प्रवर्तमान नियमो और कानून की पुस्तके पहोंचानी होगी, विधानसभा चलाने के नियम और संसद चलाने के कानून की पुस्तके देशके सभी घरमें पहोंचानी जरूरी हे…..सरकार क्यां हे..वो सरकार कौन हे ? आम आदमी का देश की सरकारमे क्या हिस्सा हे वो बातें और हर एक नागरीक का क्या अधिकार हे ऐसी सभी बातो को देश के हर घरमें पहोंचाना जरूरी है.

      बाबा रामदेवजी की मुलाकात स्व. राजीव दिक्षितजी से होने के बाद उसने स्वाभीमान यात्रा शुरू की हे आज हमारे बीचमे राजीवजी रहे नहीं तो हमारे युवांओ को ही इस कार्य के लीये स्वयंभु कार्यरत होना है, देशके राज्योकी सरकार चलाने का सामर्थ्य स्वाभीमान के संगठ्ठन में जुटाना होगा, भ्रष्ट सरकारे चलानेवाली राजनैतिक पार्टीओ को हमें ही भगाना होगा. जब अपना ही घर जल रहा हो तो बहार से कोइ दुसरा आकर उसे बुझा नहीं शकता हमें ही अपने घरमें लगी आग को खुद हीं बुझानी है.

      देशमें चलती राजनैतिक सरकारो को उखाडने के लीये देशमें चल रहे सभी संप्रदायो को एक मंच पर खडा होना पडेगा…..भारतीय समाजके सभी संप्रदायो को एक मंच पर आना होगा.. देशका हर आदमी पीडीत हे… देश में जीसकी कथायें सुनेने को हज्जारो लोग जमा होते हे तो ऐसे कथाओ से देश के लोगो के विश्वासु बने है जीस के उपर आम आदमी का धार्मिक विश्वास बन है ऐसे संत समाज को और संप्रदाय के बडे मुख्याओ को एक मंच पे आना जरूरी है…..हमे देश के सभी राज्यो में धर्म परिषद का आयोजन करना है. अगर देश के सभी संप्रदायो के मुख्या और संगठ्ठनो के अच्छे लोग एक मंच पर खडे हो जायेंगे तो देशकी दिशा बदल जायेगी……

      संप्रदायो के मुख्याओ को एक मंच पर जमा करना बहुत आसान काम हे… क्यु कीं भ्रष्टाचार कैसे होता हे . मत की किम्मते क्यां हे.. और धर्म क्या हे और देश के प्रतिहर एक आदमी का कर्तव्य कया हे वो जानकारी घर घर तका पहुंचाने के लीये धर्म का और धार्मिक कार्यक्रमोका माध्यमही सबसे कारगत है उसके बाद लोगो को अपने सही फर्ज और खुदकी किंमत समजमें आयेगी…………

देशके संविधान और दुसरे कानून की पुस्तके घर घर मे पहोंचेगी तो आम आदमी को पता चलेगा की तंत्र व्यवस्था क्या हे और खुद की जेब से रोजाना कीतना टेकस सरकारी तीजोरीमे जाता है, भ्रष्टाचारी लोगो को और उनके परीवार के लोगो को वोट देना भी पापकर्म है. हर आदमी रोज टेकस देता है और उसको भ्रष्टाचारकी व्यवस्थाओ की सिवा क्यां मिलता है तो ये बात भी सही है की राजनैतिक उम्मीदवारो को वोट देना एक पापकर्म ही है. एक बार चुनाव जीत कर लोकप्रतिनिधत्व की सेवा कर लेता है उसको और उनके घरके दुसरे सदस्य या रीश्तेदार को वोट देने से पापकर्म ही होता है. आज जो भ्रष्टाचारमें देशकी सरकारे डुब चुकी है उसका कारन भी यही है.

      लोग जानते हे की  चुनावमे तो बदमाश लोगो को ही पार्टीया टीकटे देती हे जो कम बदमाश हे उसी को वोट देना पडता हे….जीसको वोट देते हे वो ही भ्रष्टाचार करता हे….अच्छे लोग चुनाव मे खडे होते हे तो कोइ उसको वोट नहीं देता…..क्युकी उसके पास संगठ्ठन का कोइ साथ नहीं होता.. अब स्वाभिमान का संगठन देशके प्रमाणीक लोगो को मदद करके वोट लाने में  बडी भुमीका अदा कर शकता है तो प्रमाणिक सरकार का सपना देखनेवालो को अब घर के बाहर आना होगा और इस जंग में सेनापति का फर्ज अदा करना है. चुनाव जीतने के लीये जो प्रचार खर्च होता हे वो प्रमाणिक लोगो के पास नहीं होता… प्रमाणिक लोगो को कोइ  धनवान भी मदद नहीं करतां प्रमाणिक आदमी का कीसीको कोइ फायदा नहीं मिलता….. तो उसको कोइ चुनाव के लिये धनराशी नहीं देते हे. लेकीन अब एसा भी समय आ रहा है की बीना पैसे अच्छे लोग देशकी सेवामें लोकप्रतिनिधि बनके सरकारमें अपनी सेवा प्रदान कर पायेगें.

      बहुत सारे प्रमाणिक लोग ऐसे भी होंगे जीसको पहेले टीकीट मांगने पर राजनैतीक पार्टीओ के नेताओने पैसे के बिना टीकीट नहीं दी थी. स्वाभिमान संगठ्ठन में बहुत सारे लोग अच्छे हे बहुत सारे लोगो की भावनायें अच्छी हे तो वो लोग देशमें से भ्रष्टाचार भगाने के आंदोलनमें बहुत अहेम भुमीका निभा शकते है, भ्रष्टाचार भगाने के जन-आंदोलन मे हाइ वोल्टेझ स्टीम्युलेशन पैदा करना हे.. जीसकी बातो से.. जीसके प्रवचन से आम आदमी के लहुमे आग भडकने लगे ऐसे लोग को स्वाभिमान के समेंलनोमें वकता की भुमीका के लीये कार्यरत होना है.

                इस ऐतिहासिक जनआंदोलन की सफलता के लीये और नयी सरकारे रचाने के लीये चुनाव खर्च भी होगा इस खर्च के लीये बहुत धन राशी की आवश्यकता है आप या कोइ भी भ्रष्ट राजनैतिक पार्टीओ की सरकार को हटाकर आम जनता की सरकार रचाना चाहते है देशमे अपना स्वराज्य लाना चाहते है तो देश मै रहेनेवाले और विदेशोमें रहेनेवाले भारतीयो को अपनी मरजी से अपने आप धन का दान करना जरूरी है. आप जो भी दान करेगें उसका राशीका आपको खास वेबसाइट के जरीये तुरंत पता चलता रहे और स्वाभिमान के जनाअंदोलन के लीये दी गयी दाताओ की धन राशीका कैसे, और कहां कितना खर्च हो रहा है वो भी आप वेबसाइट में रोजाना देख शकोगें.

      राजनैतिक दलोने चुनाव के लीये और पार्टी के खर्चको निपटने के लीये जो भ्रष्टाचार कीया वो स्वाभिमान के संगठ्ठन में पुनरावर्तित ना हो इसलीये स्वाभिमान के जन आंदोलन को धन राशीकी जो भी आवश्यकता है वो देश के आम आदमी को ही जुटाना होगा.

देशमें फैले बहुत सारी भ्रष्ट राजनैतिक पार्टीओ को हटाने के लीये बहुत बडा देशभर के गांव गांवमें कार्यरत समितिओ का राष्ट्रीय संविधान भी बनाया जायेगा और वेबसाइट पर समिति के कार्यलयो पर उपलब्ध कराया जायेगा. बहुत सारे राजनीती के समिक्षको ऐसा है के ये जन आंदोलन के पास कोइ दिशा यां मेनेजमेन्ट नहीं है.. तो ये गलत बात है.. मेनेजमेन्ट भी है और जो उद्देशो को सफल करना है उसके लीये साफ साफ दिशायें है.

देश के बहुत लोग अभी भी यें मानते है की ये स्वाभिमान का जनाअंदोलन बाबा रामदेवजी और उनके साथीओ का जन आंदोलन है.. वास्तवमें इस जन आंदोलन की निव स्व.राजीव देक्षितजी और बाबा रामदेवजी ने रखी थी आज वो देश के सभी नागरीको अपना आंदोलन बनकर भ्रष्ट सरकारो को दुर करने का नया इतिहास बनाने जा रहे है…

परीवर्तन प्रकृतिका नियम है तो जो हे वो जरूर बदल शकता हे, आप इतना तो कीजीये की एक बार जीस को वोट दीया हे उसको दुबारा वोट ना दे, आप का एक वोट भी देश की दिशा बदलनेका रास्ता बन शकेगी, आप भ्रष्टाचार दूर करना चाहते हो तो अपनी जाती और ज्ञाति के कीसी उम्मीदवार को वोट ना दे.

हमे तो अपने ही बरबाद कर रहे है दुश्मन की बाजुंओ मे जोर कहां है,,,,….


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